रविवार, 7 दिसंबर 2014

आंसू ढुलक पड़े


07 December 2014
20:49
-इंदु बाला सिंह


रात शायद कल गम में डूबी थी
तभी तो
सूरज को देखते ही
पत्ते पर रुके आंसू ढुलक पड़े |

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