शुक्रवार, 12 दिसंबर 2014

मैं बाधायें फलांग चली


11 December 2014
18:44
-इंदु बाला सिंह

एक दिन तुमने मन ही मन हंस कर कहा -
अपना अपना भाग्य
मैंने
महसूसा लहजा
रौंदा भाग्य अपना 
और
आगे बढ़ चली
बांध के
गांठ में वक्त अपना
धुन की पक्की
बावरी सी
मैं
बाधायें फलांग चली |

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