11
December 2014
18:44
-इंदु बाला
सिंह
एक
दिन तुमने मन ही मन हंस कर कहा -
अपना अपना
भाग्य
मैंने
महसूसा लहजा
रौंदा भाग्य
अपना
और
आगे बढ़ चली
बांध के
गांठ में वक्त
अपना
धुन की पक्की
बावरी सी
मैं
बाधायें फलांग
चली |
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