सोमवार, 15 दिसंबर 2014

कमरे कमरे बदला पानी


15 December 2014
22:31
-इंदु बाला सिंह

यारा !
तुम तो कहते
गांव गांव बदलता पानी
पर
हमने तो
कमरे कमरे बदलते देखा पानी
समय बदला
सो
ऋतू भी बदली
बचपन के साथी बदले
सहोदर बदले
पैसा बदला
कभी सफेद कभी काला 
कभी नाच नचाता इंसान को ता ता थैय्या
तो
कभी कुर्सी का सुख देता |

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