बुधवार, 17 दिसंबर 2014

जिन्दगी की कविता


18 December 2014
07:23
-इंदु बाला सिंह


जिन्दगी का उपन्यास पढ़
भूल जाते हैं हम
पर
जिन्दगी की कविता
पीछा न छोड़ती हमारा
अकेले होते ही चुभोने लगती ........
महसूस कराने लगती हमें यह हमें अपना अस्तित्व ........
इतना आसान भी न होता भूलना उसे
और
ऐसी रचनाओं को
भूलते भूलते
कभी मैं एक कविता न बन जाऊं
यह भाव लिये बस चलता रहता यह अनूठा जीवन |

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