18
December 2014
07:23
-इंदु बाला
सिंह
जिन्दगी का
उपन्यास पढ़
भूल जाते हैं
हम
पर
जिन्दगी की कविता
पीछा
न छोड़ती हमारा
अकेले होते ही
चुभोने लगती ........
महसूस कराने
लगती हमें यह हमें अपना अस्तित्व ........
इतना आसान भी
न होता भूलना उसे
और
ऐसी रचनाओं को
भूलते भूलते
कभी मैं एक
कविता न बन जाऊं
यह भाव लिये
बस चलता रहता यह अनूठा जीवन |
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