16
December 2014
09:18
-इंदु बाला
सिंह
कितने
उपवास करूं ?
कौन
सा उपवास करूं !
अब रात में
आकस्मिक
स्थिति में कैसे नहाऊं
आफिस भी जाना
है न
आफिस की
कांच
की छत ( ग्लास सीलिंग ) भी तोड़नी है
प्रोमोशन के लिये
घर में काम
है
बच्चे
सम्हालना है
ओ
रे वक्त !
कौन सा
त्यौहार मनाऊं
अपने गांववाला
या
पड़ोसन के
गांववाला
कितनी
मैनेजमेंट करनी पड़ती मुझे
जीने के लिये
तू समझना क्यों नहीं चाहता वक्त |
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