सोमवार, 15 दिसंबर 2014

जीने के लिये कितनी मैनेजमेंट


16 December 2014
09:18
-इंदु बाला सिंह

कितने उपवास करूं ?
कौन सा उपवास करूं !
अब रात में
आकस्मिक स्थिति में कैसे नहाऊं
आफिस भी जाना है न
आफिस की
कांच की छत ( ग्लास सीलिंग ) भी तोड़नी है प्रोमोशन के लिये
घर में काम है
बच्चे सम्हालना है
ओ रे वक्त !
कौन सा त्यौहार मनाऊं
अपने गांववाला
या
पड़ोसन के गांववाला
कितनी मैनेजमेंट करनी पड़ती मुझे
जीने के लिये
तू समझना क्यों नहीं चाहता वक्त |

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