27
November 2014
09:56
-इंदु बाला
सिंह
विश्वास का पंख तोला था उसने
और
लगा दी थी
उसने छलांग
एक दिन देखा
सबने .....
वह उड़ रही है
मुहल्ले के
लोग
हैरत में थे
और
इन्तजार कर
रहे थे
उसके पंख के
टूटने का
पर
वह उड़ रही थी
ससम्मान जी
रही थी ......
शायद
वक्त उसे
सहारा दे रहा था |
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