02
December 2014
07:39
चाह नहीं
सम्मान
की ......
जैसे आये हैं
वैसे ही
चले जायेंगे एक दिन ........
कुछ पल जी के
पानी का बुलबुला सा मिल जायेंगे
सागर में हम ......
और
कर जायेंगे रौशन तेरा नाम
दे जायेंगे
तुझे
आज से बेहतर दिन
ओ सन्तान !
कि
तुम ही हो भविष्य
इंसानियत के |
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