रविवार, 11 अक्टूबर 2026

पिता की बेटी

 


 

 

पिता अस्पताल में गुजरे

 

उस समय मैं भी उसी अस्पताल में भर्ती थी

 

घर लौटी तब पिता का शरीर अस्पताल में  था

 

दो दिन तक अस्पताल में रहा

 

बेटे के आने के बाद अस्पताल का शरीर एम्बुलेंस से उतरा

 

माँ दहाड़ मार कर रोई

 

रिश्तेदार उसे पकड़ कर पिता का मुंह दिखाये और वहां से कमरे में ले गए

 

मैं वीडियो बनाती रही

 

लोग अंतिम दर्शन के लिए आते रहे

 

फूल चढ़ाते रहे

 

पंडित के कर्मकांड के बाद पिता का शरीर स्वर्गवाहन पर चढ़ा

 

लोगों के काफिले संग स्वर्गवाहन चल पड़ा

 

सड़क के अंतिम छोर तक चलती रही मैं कैमरे के साथ

 

मैं अवांछित थी

 

अंत्येष्टि के समय मैं  न थी

 

मैंने कैद किया पिता के शरीर के जाने का

 

मैं  सुख दुख से परे मात्र अपने पिता की बेटी थी ।

 

 

अच्छी लड़की


 

 

वह अच्छी लड़की थी

 

मुझे शादी नहीं करनी

 

तो क्या सारा जीवन यहीं बैठी रहेगी ?

 

बेटी चुप

 

आखिर बेटी की शादी हो गई

 

बेटी अच्छी बहू बनी

 

पति चार बच्चों समेत बीबी को छोड़ कर भाग गया

 

कष्ट से खुद की थोड़ी कमाई में बच्चे बड़ा किया

 

अच्छी औरत ने

 

एक लड़की ने घर से भाग कर ब्याह कर लिया

 

और

 

वह जब तब  सुनाती है

 

मैं तो एक कपड़े में घर से चली गई

 

दूजी संतान बोलती है

 

ब्याह किया है  तो औलाद को तुम नहीं तो कौन पालेगा

 

हमे पाल कर कौन सा बड़ा काम किया

 

अच्छी लड़की का बुरा अंत हुआ।

 

 

 

 

शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026

जीवन का अनुभव


 

 

बुरे , दुखद संबंधों से अलग होना उस पल की मुक्ति है

 

नए सुखद संबंध बना पाना स्वतंत्रता है

 

उलझन मिटना नहीं

 

उसको सुलझाना हमारी मानसिक परिपक्वता है

 

माता पिता के कटु अनुभूतियों को सीखना

 

हमें जिंदगी में तेज चलना सिखाता है

 

बारंबार निकटस्थों की ओर स्मृतियों का लौटना

 

जोड़े रहता है हमें

 

अपनी जड़ों से

 

अतीत का भूलना दिगभ्रमित करता है

 

कमजोर करता है

 

उम्र के साथ मजबूती आना ही जीवन है ।

गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026

भाग्य भरोसे



मन में


मौसम की तरह आते हैं  विचार


वे हमे गढ़ते हैं 


कभी कभी वे वास्पीभूत हो जाते हैं


जीवन की बगिया से खर पतवार चुन फेंकना हमारा कौशल है 


निष्क्रिय इंसान खर पतवार के बिछौने पर भूखे पेट सोता है


भाग्य को कोसता है ।



जीने के लिये


 

 

 

ब्याह

 

सुरक्षा है

 

अपनापन है

 

अकेलापन दूर करने का कानूनी साधन है

 

आपके पास कोई संबंधी न हो

 

तो पति ही सही है

 

पर

 

जीवन में कुछ बन पाने के लिए

 

जरूरी है  अपने चारों ओर खींचना एक सीमारेखा

 

इसके अंदर हर किसी का प्रवेश निषिद्ध है ।

 

 

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026

गुम हो रही तहज़ीब


 

 

तहजीब पलती है

 

रईसों के घर में

 

गरीब के घर में पलती है लडा़इयाँ

 

लड़की लड़ती है घर में

 

लड़का लड़ता है घर और बाहर दोनों जगह

 

वे लड़ते हैं

 

रोटी के लिए

 

खाट के लिये

 

लोग इन लडा़इयों  को समाज का परिवर्तन समझ लेते हैं

 

क्रांति समझने की भूल कर बैठते हैं

 

मिट जाती है

गरीब की भाषाएं और नस्लें

बंगाल के अकाल की तरह

 

कोई रईस कैद कर लेता है यह कहानी साहित्य के पन्ने में ।

 

बुधवार, 30 सितंबर 2026

छोटा बेटा


 

मेरा पिता खो गया बचपन में

सपने देखे मैने

अंग्रेजी पढ़ कर नौकरी तलाशी

डाटा साइंस भी पढ़ लिया

पर नौकरी सोने के हिरण सी छलती गई

हाथ ही न आई

किसी राज्य का बाशिंदा न था

छोटी जात का न था

महज भारतीय पुरुष था

सच्चाई और मेहनत की उंगली पकड़ चलता रहा

जेब फटी थी

जो पैसे आए

विकराल अभाव के कुएं में गिरते रहे

मां बहन अपना मकान के सपने देखते रहे

और

मैं घर का छोटा बेटा अपना परिवार बसाने का

सपने आते रहे

बाल सफेद होते रहे ।

 

सोमवार, 14 सितंबर 2026

मोह

 

 

नदी के इस पार खड़ी  हूं

 

जला दिया है लौटने का पुल खुद मैने

 

निहारूं मैं पुराना भग्नावशेष

 

जितना भी दौड़ूँ

 

आगे न बढ़ पाउं

 

यह कैसा मोह है पुरातन का

 

बढ़ने न दे आगे

 

बदबू भी न महसूस कर पाऊं

 

संबंधों के सड़ेपन की ।

मंगलवार, 8 सितंबर 2026

वैराग्य


 

वैराग्य आता है

 

स्वार्थी पिता , पति और पुत्र की तरह

 

तुम्हें किसी भी उम्र में

 

छुड़ा देता है ....


तुम्हारा हर दुनियावी रिश्ता

 

वानप्रस्थ कर देता है वह तुम्हे

 

तुम देश के आदर्श नागरिक नहीं रह पाते ।

 

 

गुरुवार, 3 सितंबर 2026

रेखाएं देखना चाहूं


खो गई मैं

 

अपने शब्दों में

 

रचनाओं में

 

महसूसा है मुझे

 

मेरे बेजुबान  मित्रों ने

 

मकान की खिड़कियों दरवाजों और विशालकाय पेड़ों ने

 

मन तैरता है

 

बस यूँ ही

 

खोजता है जन्म का कारण

 

वृहद अभेद्य भुभुलैया सा मन

 

यात्रा करता रहता है अतीत से वर्तमान में

 

भविष्य कुहासामय है

 

हथेली भी न दिखे

 

रेखाएं कैसे पढ़ूं

 

 

शुक्रवार, 28 अगस्त 2026

लड़की और पितृसत्ता


 

 

ब्याह तो करना ही है

 

ससुराल ही तुम्हारा घर है

 

पति बहुत कुछ छोड़ कर गया होगा

 

बेटा है न

 

उसको क्या चीज की कमी है

 

भाई अपना परिवार के उत्थान में लगा है

 

लड़की को मकान की क्या जरूरत

 

बेटी चालीस हजार रुपया महीना कमा रही है

 

भाड़े के घर में माँ के साथ है

 

दूसरी बेटी ने दोस्त का पति चुरा लिया है

 

लड़की  सवर्ण है ।

 

 

गुरुवार, 27 अगस्त 2026

कोई चाह नहीं


 

 

भूल चुकी

 

मैं तो दुःखद अध्याय जीवन के

 

क्या रखा अब बीते पल में

 

पुराने अपनों में

 

साथ न दिये रक्त संबंधी और रिश्ते

 

अहंकार में डूबे वे

 

ईश्वर की लाठी का प्रकोप भी वे भूल चले

 

चाहूँ मैं अब जीना

 

बिना आकांक्षा के ।

घर में लड़कियां


 

 

 

 

लड़की को कॉलेज में एडमिशन में कोटा है

 

सरकारी छात्रवृत्तियां हैं

 

घरों में मुहल्लों में नवरात्रि में पूजी जाती हैं कन्याएँ

 

भाइयों की तरह पिता से पिटाई नहीं खाती लड़कियां 

 

घर की इज्जत होती हैं लड़कियां

 

घर की नींव बनती हैं लड़कियां

 

फिर भी

 

साहित्य महिलाओं पर होनेवाले अत्याचार से भरा पड़ा है

 

आखिर क्यूँ और कैसे ।

 

 

 

 

शनिवार, 22 अगस्त 2026

बिंदी


 

आज देखती हूँ

 

बड़ी बिंदी लगाती हैं महिलाये

 

यद्यपि उनका साथी गुजर गया है

 

अच्छा लगता है इस परिवर्तन को देख कर

 

और

 

मुझे वह महिला याद आयी

 

जिसने अकेली औरतों को के मान के लिये कभी बिन्दी ही न लगाई

 

वह माँ याद आई

 

जिसने अपने दामाद के गुजरने पर खुद सिंदूर लगाना छोड़ दिया

 

कुछ लड़ाइयाँ अपने तरीके से लड़ते हैं

 

और

 

कुछ बंधन लड़कियां सहर्ष पसंद करती हैं

 

ब्याह करना लड़की के शान की बात है न कि जरूरत।

गुरुवार, 20 अगस्त 2026

चालीस वर्ष बाद


 

 

गूगल फोटो ने पुरानी याद दिखाई

 

भरे पूरे परिवार की

 

सब खुश थे

 

जमी ़बर्फ़ क्रच आवाज के साथ मन की दीवार छोड़ दी

 

अब श्रम करने की सामर्थ्य न रही

 

समय ने सब तहस नहस कर दिया था

 

आज आंखों में सुखद स्वप्न के निशान न  हैं

 

चालीस वर्ष भी कुछ होते हैं ।

शनिवार, 15 अगस्त 2026

लौट के मत आना



माँ ने कहा 

गाँव में ब्याह देंगे

पिता लड़का ढूंढते रहे 

लड़की को नौकरी में न लगवाया 

ससुराल में जा कर करना 

आखिर लड़का मिला 

शहर में 

लड़के का मकान था 

ब्याह कर रहे हैं 

लौट के मत आना 

माँ ने कहा 

ब्याह हुआ 

चार बच्चे हुए 

लड़के का काम धंधा बंद हो गया

मकान बिक गया

लड़का बीबी और चार बच्चों को किराए के मकान में छोड़ कर भाग गया ।


मंगलवार, 11 अगस्त 2026

चेतो लड़कियो


 

 

ब्याह के लिये

 

कुल गोत्र का ख्याल रखना है

 

लड़के की पक्की नौकरी चाहिये

 

दहेज का इंतजाम पिता करते हैं

 

ब्याह के बाद

 

अपना अपना भाग्य

 

और

 

जिसके पिता न हों

 

उसका भी अपना भाग्य

 

कब चेतोगी लड़कियों ।

शनिवार, 8 अगस्त 2026

काम चाहिये


 

 

किसान ने अपने चारों बच्चों को पढ़ने का मौका दिया

 

नौकरी मिल जाएगी

 

घर सम्हल जाएगा

 

माँ घर संभालती रही

 

अपनी  निकम्मी संतानों का दुख भोगती रही

 

दोनों बेटे और एक बेटी ट्यूशन कर के हाथ खर्च निकलते रहे

 

प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते रहे

 

वैकेंसी चार साल बाद निकली

 

प्रश्नपत्र लीक हुआ

 

रईसों ने प्रश्न पत्र खरीद लिया

 

परीक्षा कैंसल हो गई

 

न भाई को काम मिला और न बहन को

 

न उनका ब्याह हुआ

 

माँ पूरे परिवार का खाना बनाती रही

 

बीमार पड़ती रही

 

इलाज के लिए पैसे चाहिए थे

 

डॉक्टर फ्री में देख लिया था

 

पर दवाओं के लिए पैसे नहीं थे घर में

 

माँ ने अपने सपनों को गाँव की नदी में बहा दिया

 

अब बच्चे जंतर मंतर की भीड़ में जुड़ गये हैं

 

वे आंदोलनरत हैं ।

 

 

 

 

 

 

 

गुरुवार, 6 अगस्त 2026

जिम्मेवार औरत


 

 

आदमी छोड़ के भाग गया औरत और एक बेटा बेटी को

 

औरत हाड़ तोड़ काम करती रही

 

बर्तन मांजती रही

 

पोचा लगती रही बड़े घरों में

 

बेटा बड़ा हो के भाग गया किसी लड़की से ब्याह कर के

 

घर जमाई बन गया

 

और लौटा

 

दो बच्चों का बाप बन के

 

बेटा महीने में दस दिन काम करता है

 

बाकी समय

 

अपनी औरत से लड़ता है

 

बिनब्याही बेटी दूसरे शहर कमाने चली गई

 

और

 

आज अपना और अपने बेटे के परिवार पाल रही है ।

निर्दोष कैदी


 

 

 

बाइस साल जेल में बिताने के बाद

 

जेल ने कैदी को निर्दोष साबित किया

 

क्या भाग्य को दोष दूं

 

या

 

ईश्वर को

 

घर लौटा तो निकटस्थ मर गये थे गरीबी की मार में

 

छोटा सा मकान मिट्टी में मिल गया था

 

अब कैदी परिस्थितियों का कैदी था

 

भीख पर गुजारा कर रहा था ।

बुधवार, 5 अगस्त 2026

आदिवासी समाज में प्रेम विवाह



हमारे समाज में मॉब लिंचिंग नहीं होता 

मेरी आदिवासी कामवाली ने मुझे समझाया 

मेरा बेटा दूसरे समाज की लड़की से ब्याह कर लिया 

मैने भोज दिया पूरे समाज को 

और 

हमारे समाज ने मेरे बेटे बहू को अपना लिया।

मंगलवार, 4 अगस्त 2026

भगवान के पैसे


 

 

कम आमदनी थी

 

ऑफिस जाने का भाड़ा के लिए

 

वह अपनी माँ के भगवान के सामने रखे सिक्के चुरा लेती थी

 

भगवान जी !

 

मैं अगले महीने तनख्वाह मिलने पर लौटा दूंगी

 

और

 

वह हर महीने भगवान की मूर्ति के सामने वापस रख भी देती थी

 

हर महीने कोई नई जरूरतें पैदा हो जातीं थीं

 

और

 

उसे भगवान के सामने रखे पैसे उठाना पड़ता था ।

 

 

 

शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

ऊंची जाति की शान


 

 

वह प्राइवेट सि्कयुरिटी गार्ड था

 

उसने शान से कहा था

 

हम ऊंची जाति के हैं

 

ये लोग अंबेडकर वाले हैं

 

आखिर कैसे यह विचार पनपा उस शहरी गार्ड के मन में

 

सोचनीय मुद्दा है ।

मंगलवार, 28 जुलाई 2026

सुख का पौधा


 

 

 

मन के अंधियारे में लगा

 

एक सुख का पौधा

 

सूखे ना

 

सदा रहे हरियाया

 

दुख के बादल में

 

ग़म के कुहासे में

 

न फले और न ही फूले

 

प्राणवायु बने

 

नैनों में चमके ।

सोमवार, 27 जुलाई 2026

पिता और बेटी





बेटी का मन ठहरा रहता है आजीवन पिता के पास


पिता गुजर भी जायें 

तो

हर सुख दुख के पल में वे याद आते हैं बेटी को


पर पैतृक मकान मिलता है बेटे को


और बेटी के पैतृक मकान की रूपरेखा बदल जाती है 


।

शुक्रवार, 24 जुलाई 2026

कर्मगति



सोच कर बोलना 

दिल न दुखाना जन्मदाता का 

कर्मगति टारै नहीं टरेगी 

जन्मदाता न रहेंगे 

उनकी यादें 

उन संग बीता बचपन रह जाएगा ।

बेहया


परिस्थितियों की आंधी में

मैं फौलाद बनना चाही

पिता जैसा मजबूत बनना चाही

दयालु और दृढ़ निश्चयी बनना चाही

मेहनतकश बनना चाही

दिन बीतते गये

मैने माँ की तरह बच्चे पैदा किये

बच्चे बड़े हुए

और

औरत ही बनी रही

न तो माँ बन सकी और न ही पिता

बस

बेहया का पौधा बन गई ।

बुधवार, 8 जुलाई 2026

अस्पताल की अटेंडेंट



मैं अटेंडेंट हूँ 

आपको मेरी सेवा चाहिए ?

मेरा बारह घंटे  का चार्ज छः सौ रुपये है।

बुखार से बदन तप रहा था मेरा 

मुझे चौबीस घंटे की देखभाल चाहिए थी

दो अटेंडेंट शिफ्ट में रहने लगे मेरे पास

नित्यक्रिया से ले कर कपड़े बदलना 

डाक्टर को बुलाना 

मेरी हर जरूरतों को पूरा किया उन्होंने

वे घर का खाना बना कर अपना खाना साथ लातीं 

दोनों के मर्द घर में रहते 

अपनी पत्नियों से झगड़ते

तीन दिन के बाद मैं डिस्चार्ज हुई

मैं उनके पैसे दे कर निकलने लगी 

उन्होंने मेरे हाथ को चूमा 

उनकी आँखें भर आयीं थी 

मैं एक पल को द्रवित हुई

मैं खुश थी 

मैंने अपने घर लौटने के लिए ओला बुक कर लिया था ।


जुनून



वे दौड़ाए सरदार युवा को 

वह भाग कर घुसा एक गली में 

फिर उसकी कोई खबर न मिली 

दंगे की  याद ने बहन की आँखें भर दी ।

दोस्त किताबें



गरीब गुरबा साहित्य प्रेमी

पढ़ता है किताबें इंटरनेट पर

ये किताबें अपने रहने के लिये जगह नहीं मांगती  कमरे में

उसकी प्यारी दोस्त किताबें उसके के संग संग रहतीं हैं ।


रविवार, 28 जून 2026

लड़कियां और मकान




मध्यवर्ग में 

मकान मिले बेटे को

लड़कियां ब्याही जाती हैं मकान धारी बेटों से

जिनका ब्याह न होय वो भाग जातीं हैं घर छोड़ कर

लड़कियों का मकान नहीं होता 

हर घर में परमानेंट सेविका है

उनकी तनख्वाह उनके निकटस्थ ले जाते हैं 

सेविका बन किसी के घर में जी लेने  की नियति है उनकी ।

सोमवार, 22 जून 2026

पीले टोपी सफेद टोपी



सफेद टोपी आदेश दे रही है सड़क से 

पीली टोपी खम्बे पर काम कर रही है

बिजली गुल है 

मैं परेशान हूँ

जनरेटर  नहीं है घर में

मुझे पीली टोपी से कोई मतलब नहीं ।


शनिवार, 6 जून 2026

पुश्तैनी मकान



उसने अपने पुश्तैनी मकान को गिरा दिया 

उस स्थान पर नया मकान खड़ा किया 

उसे पुश्तैनी मकान पसंद था 

पर हर थोड़ी देर में उस मकान के खिड़की  दरवाजे  , दीवारें  बोलने लगतीं थीं

उसे आवाजों से सख्त नफरत थी 

उसने पूरे घर को एयर कंडीशंड कर लिया ।


रविवार, 24 मई 2026

मैने उसे सदा अकेली पाया



वह बरामदे की सीढ़ी पर  बैठी है 

उसके संग उस के रिश्ते हैं 

गांव के परिचित हैं 

पोखरी का पानी है 

अमराई है 

छांव तले खेलते लड़के हैं

स्कूल कॉलेज के मित्र है 

खट्टे मीठे अनुभव हैं 

पेड़ पौधे हैं 

बरसते बादल हैं 

सामने चिलचिलाती धूप भी बैठी है

सभी बतियाते हैं उससे

वे सदा उसके साथ रहते हैं 

सबको जीना है

चरित्र बनना है

सबको शब्द चाहिए

कोलाहल सा रहता है उसके मन में 

सभी पात्रों को 

जीना है पुस्तकों में 

वह  सो जाती है 

तो कभी-कभी वे उसके सपने में आते हैं 

वह अकेली नहीं है 

रास्ते में चलते समय भी वे उसके साथ-साथ चलते रहते हैं 

वह लेखक है ।


जीवन संध्या



जीवन के उत्तरार्ध में 

टूट जाता है दिल 

और 

निर्मोही हो जाता है मन ।


बीते कल की याद



वे भी दिन थे 

एक पल की खुशी के सहारे जीवन बीत जाता था 

बड़े खुले घर थे 

पांच किलो चावल का जमाना न था 

सुख दुःख सांझे थे

गीतों के संग जीते थे

सूरज देवता और दयू का सहारा था

संतुष्टि थी 

शहर विदेश था 

अंग्रेजों से त्रस्त थे 

आकांक्षा कम थी 

हम खुश थे ।


कलछुल की मार


 

 

 

वह अपने ब्याह में सूटकेस भर बर्फी लाई थी

 

मुझे बर्फी खाने में बहुत मजा आया था

 

वह प्लस टू पास थी

 

सुना था मैने

 

किसी बात पर कळछुल से मार कर जेठ ने सिर फोड़ दिया था उसका

 

निकम्मे पति की पत्नी थी वह

 

एक बार मैके गयी तो फिर न लौटी वह

 

वह मेरी भाभी थी ।

बुधवार, 8 अप्रैल 2026

कॉलेज के बच्चे

 


 

 

लड़के ने गर्लफ्रेंड को हड़काया - दूंगा एक झाप ठीक हो जाएगी

 

गर्लफ्रेंड  चुप रही

 

ये कैसी दोस्ती थी

 

एक लड़की का अपने ब्वाय फ्रेंड के सिर पर चंपी कर रही थी

 

पार्क में ब्वॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड की बहार रहती है

 

सैर करनेवाले निस्पृह सैर करते रहते हैं

 

इन बच्चों की  दुनियां सुंदर स्वप्निल  है

 

ये कॉलेज में जिंदगी का नॉलेज खोजते हैं  ।

रविवार, 5 अप्रैल 2026

प्रवासी मजदूर

 


 

1

 

 

पुरुष जा रहे गांव

 

गैस सिलिंडर पांच हजार का एक

 

होटल बंद

 

क्या खाएंगे

 

क्या पत्नी , बच्चों को खिलाएंगे

 

क्या गांव में भेजेंगे

 

स्टेशन में गांव लौटनेवाले  मजदूरों की भीड़ है

 

लौटेंगे जब सिलिंडर का दाम कम होगा

 

 

 

2

 

 

शहर में महिला

 

 

अकेली है

 

माता पिता चिंतक हैं

 

सिलिंडर का दाम पांच हजार हो गए

 

इंडक्शन खरीदने के लिए पांच हजार भेज देना

 

पानी खरीद कर पीती हूं 

 

खर्चे बहुत हैं

 

पिता चिंतित हैं

 

मां दुखी है

 

शादी हो गई होती लड़की की तो निश्चिंतता होती

 

लड़की  व्यस्त है  ..... मस्त है

 

कहीं युद्ध हुआ है

 

देशवासी त्रस्त हैं ।

 

 

 

3

 

 

प्रवासी मजदूरों के लिए

 

छोटू सिलिंडर योजना शुरू  की गई है

 

हम पता करेंगे

 

कैसे नहीं मिल रहा कुकिंग गैस सिलिंडर।

मैं अनबुझ हुं


 

 

पिता के मकान में

 

गरीबी के पल में

 

बच्चों समेत सीमेंट के फर्श  पर सुस्ताती हूं

 

याद आता है

 

दादा का  गांव का विशाल मिट्टी का मकान

 

मिट्टी के फर्श पर चाची के बगल लेटा निश्चिंत बचपन

 

हर शाम व्यस्त हो जाती हूं ड्राइंग  रूम की बहस में

 

गुटबाजी में

 

पितृ सत्ता को कोसने में ।

बुधवार, 1 अप्रैल 2026

घर ही जीवन है ।


 

 

 

हर घर में कोई न कोई रहता है

 

मां, बहन , भाभी , मौसी , बुआ , भांजी , भतीजी

 

हर घर पुकारता है

 

थके यात्री को

 

रिश्तों को

 

पुरुष रिश्तों को .....

 

मकान में घर है

 

और घर में मिठास है ।

 

गरीब वर्ग  अपना मकान अपनी पत्नी के नाम कर जाता है

 

स्त्री है तो घर है ।

 

 

 

 

शुक्रवार, 27 मार्च 2026

महिलाओं का उत्थान

 

 


 

 

 

असंतोष है

 

प्रतिक्रिया है

 

पर घर में ही संगठित नहीं है औरत

 

परिवर्तन कैसे हो

 

सत्ता क्या बदलेगी

 

खाली राजनीतिक मुद्दा हैं औरतें

 

मीडिल क्लास वर्ग हो या मजदूर वर्ग हो

 

घर की आर्थिक आय बढ़ाने का श्रोत हैं औरतें ।

 

चार कदम आगे हैं

 

पर उसी पल वे तीन कदम पीछे हो जाती हैं औरतें ।

सोमवार, 23 मार्च 2026

जेंडर इनएक्यूएलिटी

 


 

 

किसी ने न बुलाया उसे

 

अपने तीज त्यौहार में

 

घर के शादी , मरण में

 

मकान के दूसरे हिस्से में रहनेवाले उसके सगे भाई को बुलावा आता रहा

 

हर घर से

 

वह रहती रही अपने बच्चों के साथ समाज से कटी ।

 

शायद भगवान ने भी अपनी निगाहें फेर ली थी ।

गुरुवार, 12 मार्च 2026

सोंच में पड़ी हूं।


 

 

ईरान में जंग  छिड़ी

 

मेरे देश में

 

कुकिंग गैस की किल्लत हो गई ।

 

मै परेशान हो गई

 

दो हजार दो  एक भरा सिलिंडर ले जाओ

 

दिव्य ज्ञान मिला मुझे

 

आंख से खून टपका मेरे

 

चिंता न करनी चाहिए सिलिंडर की

 

सरकार समाधान करेगी समस्या का

 

एक महिला ने मुझे ढाढस दिया

 

मुझे कोविद काल याद आया

 

देखते देखते कितने परिचित काल के गाल में समा गये थे

 

मैने अपने पासबुक को जोर से पकड़ा

 

इसमें मात्र हजार रुपये थे इस वक्त

 

कहा  से लाऊंगी बाकी के हजार रुपये

 

सोंच में  पड़ गई

 

होश है

 

तो

 

कल्पना ही ।

गुरुवार, 5 मार्च 2026

जीवन संध्या में गृहणी

 

 

थका हारा मेरा मन

 

कभी खुद

 

तो

 

किसी के कहने पर मजबूरी में

 

घर में

 

देवी देवताओं के पूजन के कर्मकांड लगा रहता है

 

हर दिन किसी न किसी देवी देवता का है

 

थक जाती हूँ मैं

 

रसोई और रिश्तों का सम्हालते

 

अपने लिए कोई समय नहीं

 

इतना करने पर भी मुझमे ही कमी है लोगों की निगाह में

 

आज सोचूँ मैं

 

क्या हर अपने काम के बाद  ईश्वरीय बंदन मौन हो के क्यों नहीं किया

 

क्यों मैने दूसरों की नकल किया

 

क्यों अपना समय कर्मकांड में खोया

 

धनोपार्जन के बारे में न सोंचा

 

क्यों निर्भर रही आजीवन

 

किसी के पैसों और मकान के सहारे जीवित रही ।

 

 

मंगलवार, 3 मार्च 2026

प्रार्थना


 

 

नसीब की बेटी हैं बच्चियां

 

जिनकी मां गुलाम है

 

कितना भी कर ले मां

 

विभिन्न रूप धर पुरुष शोषण करता है उसका

 

कभी अपने शारीरिक सुख के लिए खेलता है  उससे

 

तो कभी मां मानमर्दन के लिए  धमकाता है उसे

 

अपनी मित्र मंडली में परोसता है उसे

 

अच्छा बन छोड़ जाता है एक दिन वह उसे समय से जूझने

 

ओ बच्चियों

 

तुझमें मुझे मेरी खुशी कैद है

 

तू मां है

 

मैने तुझे मां बनने मौका न दिया

 

 

मैं गुनहगार हूं तेरी

 

मै तुझे दुनिया में लाई

 

पर जीने का मौका न दे पाई

 

मुझ पर ईश्वर का वज्र गिरे यही प्रार्थना है मेरी ।

 

रविवार, 1 मार्च 2026

विकास चाहिए

विकास के लिए

समय के साथ परिवर्तन जरूरी है 

युद्ध जरूरी नहीं 

घर हो या बाहर 

युद्ध शारीरिक हो या वैचारिक 

परिवर्तन नहीं 

 विनाश लाता है ।

मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026

लड़की सोंच में


 

 

सुरक्षित और सुखी रहेगी

 

घर में लड़की

 

कह कर दान कर दी गई वह

 

लड़की खुश थी

 

दूसरों की कमाई खाने की आदत थी

 

गाँव छूटा

 

अफसर की बीबी बनी

 

ए ० सी० , कुकिंग गैस , तीन तीन नौकर राज मिला

 

अफसर के एक वाक्य ने स्वप्न तोड़ दिया उसका

 

  • तुम्हारे बाप का घर नहीं है ये ।

 

 

आज वह दिग्भ्रमित है ।

 

 

 

 

गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

हथियार


 

 

बच्चे पैदा करने के एवज में मिले खाना

 

सबल तलाशे अपना सुख

 

मातृत्व के नाम पर पूजनीय बनाया उस ने

 

पैसे कमाना सीख

 

ओ री लड़की ।

सेवा से न मिले मेवा


 

 

बच्चे पैदा करने के एवज में मिले खाना

 

सबल तलाशे अपना सुख

 

मातृत्व के नाम पर पूजनीय बनाया उस ने

 

पैसे कमाना सीख

 

ओ री लड़की ।

गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026

पिता

 

 

दुखेगा दिल तो फुंफकार उठेंगे

 

पिता  ...

 

सोये हैं वे

 

बेटी के दिल में ।

बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

ईश्वर को ढूंढूं मैं


 

 

एपिस्टिन फाइल खुल रही थी

 

ईश्वर गायब था

 

बच्चियां मर रहीं थीं

 

पका कर खाई जा रहीं थी

 

अबोध लड़कियां गायब हो रहीं थीं

 

किसी अखबार ने खबर छापा था

 

एक बलात्कार की भुक्तभोगी ने लिखी थी आत्मकथा

 

माहौल में सनसनी थी

 

सोया मुद्दा गरमाया

 

बालिका संरक्षण गृह क्यों बनता है

 

घर  में अपनों के पास बालिकाऐं सुरक्षित नहीं हैं क्या ।

इतिहास की राजनीति


 

 

संतान का पैर आपके जूते में सामने लायक हो  जायेगा एक दिन

 

याद रखें

 

अपरिचित हो जाएंगे वे आपके लिये

 

मोहमुक्त रहना सुख देता

 

आपकी छाया नहीं धन चाहिए

 

उन्हें

 

नया विश्रामागार भाये

 

इतिहास की राजनीति करते वे ।

 

रविवार, 25 जनवरी 2026

मां का गणतंत्र दिवस

 

 

 

बच्चे थे

 

गणतंत्र दिवस था

 

वह स्कूल यूनिफार्म पहने बच्चों को सूर्योदय से पहले स्कूल बस में बैठाने निकलती थी

 

अब बच्चे बड़े हो गए हैं

 

विदेश में रहते हैं

 

खूब कमा रहे हैं….....

 

आज घर चुप हैं

 

ठंडा है

 

चाय पीनी पड़ेगी

 

वह रसोई में चल दी ।

 

 

मंगलवार, 6 जनवरी 2026

कुलबुलाता भूतकाल


 

 

खाना पकाते समय हाथ में आता है

 

 भगोना , थाली , डेगची

 

और

 

उनके संग जगता है सोया इतिहास

 

गैस चूल्हे के संग जगती है

 

कोयले की अंगीठी

 

और

 

कोयला खरीदने के लाइन में  लगी एक बालिका

 

और

 

हंगामा

 

कुचली जाती है

 

कोयला भरे  ट्रक से लाइन में लगी पांच वर्षीय लड़की .....

 

 

सेल के टाउनशिप की बेटी मैं

 

याद करती हूं

 

सेल का अस्पताल

 

डाक्टर की लाइन में एक पंद्रह वर्षीय लड़की

 

दर्द देते दांत को निकलवा कर साइकिल से लौटती घर

 

रात में कम्युनिटी सेंटर में फिल्म देख कर पड़ोसियों के संग लौटती लड़की

 

बस सांसे लेती रहती है वह अबोध लड़की .....

 

हम लिख नहीं पाते भविष्य तो

 

दुलारता है भूतकाल ।