रविवार, 21 दिसंबर 2014

स्वारथ का संसार


21 December 2014
23:25


-इंदु बाला सिंह

जाने कैसे भूल जाते
बहन की गोद में खेल कर बड़े हुये
उसके हाथ की पकाई रोटी खा कर तंदरुस्त हुये
धनी बलवान बीबी बच्चोंवाले भाई
अपनी बहन को
कि
उसकी सिर छुपाने लायक पैतृक छत भी
उन्हें असह्य लगने लगती
ये बराबरी का पाठ पढ़नेवालों के
दीये तले
सदा अँधेरा ही रहता  .........
स्वारथ का सब संसार
शहरों में कैसे कैसे रिश्ते !
जो अपने के नहीं
वे 
पराये के हों कैसे |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें