गुरुवार, 11 दिसंबर 2014

आत्मीय का शोषण


28 November 2014
21:44
-इंदु बाला सिंह

एक बार मांग माफी
अपने पुत्र के कर्म की
तुम तो
चले गये बैठने
अपनी आरक्षित कुर्सी में
पर 
हर बार मिलनेवाली मानसिक प्रतारणा
के विरोधी पल में भी 
क्यों आ जाते हो
तुम
मेरे सामने
और
अपने निरीह चेहरे द्वारा
मेरा शोषण करना शुरू कर देते हो |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें