04
December 2014
07:55
-इंदु बाला
सिंह
वह एक सर्दी
की रात थी
जब
तूने
बंद कर दिया था दरवाजा .......
बिसुरी थी
रात
उस
दिन मुझ संग ...............
और
आज यह सर्दी
की एक सुबह है
जब
तूने फिर बंद
कर दिया दरवाजा
पर
आज
मुझ संग सूरज है ..........
किलक
उठा वह देख मुझे
और
वक्त ने खोला
दरवाजा मेरे लिये
कहा मुझसे
........
उस के सौभाग्य
द्वार में तो अब जंग लग गये
निश्चिन्त
रह तू |
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