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December 2014
11:57
-इंदु बाला
सिंह
तीन
बेटियां थी ब्याह दिया ......
अरे
! इतने बड़े नहीं हम कि बेटियां पढ़ायें ......
एक बेटा है पढ़
रहा है
जितना चाहेगा
पढ़ेगा
गांव में खेत
है बंटने की गुंजाईश नहीं
एक ही बेटा है
न
सब तो उसी का
है ...
हम लोग बेटी
को थोड़े न हिस्सा देते हैं ...
बेटी को बार
बार देना पड़ता है न जब जब वह आती है मैके तब तब
नाती नातिन के
जन्म उत्सव में ब्याह में
तीज में
त्यौहार में
बहुत खर्च
होता है हमलोगों में ..........
कामवाली कहती
जा रही थी
और
मैं असहाय सी
सोंच रही थी
अरे !
हम बड़े लोग तो
बेटी ब्याह
गंगा नहा लेते हैं
कैसा हिस्सा
और
कैसा त्यौहार
का उपहार
हम शहरी हैं
उत्सव की
फुर्सत नहीं हमें |
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