20 December 2014
08:21
-इंदु बाला सिंह
मन तो कहे .........
थाम ले
आत्मबोध और इमानदारी में ढली लाठी
और
कर प्रहार ....
हो जाय कपालक्रिया तेरी ....
ओ दुश्मन मेरे ! .......
पर छोड़ दिया मैंने तुझे
जीने के लिये
वक्त के साए में
क्योंकि सुन ली थी
उस क्षण मैंने
अपनी बुद्धि की |
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