05
December 2014
22:07
-इंदु बाला
सिंह
माना स्त्री
धन होती थी
और
सारे
युद्ध स्त्री हेतु ही लड़े गये
पर
अब न तो
स्त्री धन है
और
न ही युद्ध की
नींव
वह अपना युद्ध
खुद लड़ लेती है
स्त्री उतनी
ही निरीह है
जितना निरीह
तुम हो ......पुरुष !
कामना करो
कि
हर स्त्री
रिश्ते
माँ , बहन ,
बेटी ........
मित्रवत रहें
तुमसे
न कि पालतू |
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