वह बरामदे की सीढ़ी पर बैठी है
उसके संग उस के रिश्ते हैं
गांव के परिचित हैं
पोखरी का पानी है
अमराई है
छांव तले खेलते लड़के हैं
स्कूल कॉलेज के मित्र है
खट्टे मीठे अनुभव हैं
पेड़ पौधे हैं
बरसते बादल हैं
सामने चिलचिलाती धूप भी बैठी है
सभी बतियाते हैं उससे
वे सदा उसके साथ रहते हैं
सबको जीना है
चरित्र बनना है
सबको शब्द चाहिए
कोलाहल सा रहता है उसके मन में
सभी पात्रों को
जीना है पुस्तकों में
वह सो जाती है
तो कभी-कभी वे उसके सपने में आते हैं
वह अकेली नहीं है
रास्ते में चलते समय भी वे उसके साथ-साथ चलते रहते हैं
वह लेखक है ।