मंगलवार, 16 दिसंबर 2014

कितने सपने हम खो देते


16 December 2014
19:37
-इंदु बाला सिंह


दिल में भाप सी उठ रही है
कलम कांप रही है ........
कितनी आशा से भेजा होगा स्कूल पढ़ने अपनों ने .......
कुछ दिनों तक बैठा रहेगा जी
हर शिक्षक का .........
कहीं गोली चली थी स्कूल में
छात्र लुढ़के थे पल भर में
कोई बच्चा हैरत से देखा था होगा गिरते किसी छात्र को
कोई घर पत्थर बन गया
तो
कोई घर बिलख उठा
ये कैसा युद्ध है ?.......
रोटी के लिये खटते खटते
न जाने कितने सपने हम खो देते |

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