27
November 2014
10:32
-इंदु बाला
सिंह
माता के
दुलारे
बेटे
पिता के
गुजरने के बाद
दो या तीन
साल में
जब जब मिलते
है
माँ से
तब तब वे
परेशान हो जाते हैं
उसके
स्वास्थ्य के प्रति
कोई उसके
मुंह में दांत लगवाना चाहता है
अच्छी तरह
चबाने के लिये भोजन
तो
कोई
चश्मा लगवाना चाहता है उसकी आंखो में
अक्षर पढ़ पाने
के लिये
फिर
मुद्दा ज्यों
का त्यों रह जाता है
और भी काम है
जमाने में
अब माँ के
सिवा
हमें जीने के
लिये
और
समस्या स्थगित
रह जाती है ..............
हैरान हैं हम
न जाने
किस झूले में
झूल रहे हैं आज
उस माँ में
खुद को देख रहे हैं हम
और
दुखी हैं |
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