18
December 2014
16:59
-इंदु बाला
सिंह
हाय
! कितने
सुंदर ब्लाउज
अरे
! साड़ियां देखी आपने !
ये जो पहनी है
मैंने आर्डिनरी है ......तीन हजार की है
अच्छी साड़ियां
तो दस हजार से शुरू होती हैं
लंहगा भी
खरीदना है न
अरे ! कल फिर
जायेंगे दूकान ........
हाय ! औरत न
होती तो रूपये कहां खर्च करते हम !
मन चहक रहा था
बुद्धि दुबला
रही थी
किसी को उसकी
चिंता न थी
वैसे
बुद्धिजीवी औरतें अच्छी न होतीं
वे कभी ठहाके
न लगातीं
गुपचुप के
ठेले पे
और
घर कितना
मनहूस रहता उनकी उपस्थिति में |
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