गुरुवार, 18 दिसंबर 2014

रूपये खर्च करना है


18 December 2014
16:59
-इंदु बाला सिंह

हाय ! कितने सुंदर ब्लाउज
अरे ! साड़ियां देखी आपने !
ये जो पहनी है मैंने आर्डिनरी है ......तीन हजार की है
अच्छी साड़ियां तो दस हजार से शुरू होती हैं
लंहगा भी खरीदना है न
अरे ! कल फिर जायेंगे दूकान ........
हाय ! औरत न होती तो रूपये कहां खर्च करते हम !
मन चहक  रहा था
बुद्धि दुबला रही थी
किसी को उसकी चिंता न थी
वैसे बुद्धिजीवी औरतें अच्छी न होतीं
वे कभी ठहाके न लगातीं
गुपचुप के ठेले पे
और
घर कितना मनहूस रहता उनकी उपस्थिति में |

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