मंगलवार, 2 दिसंबर 2014

गिड़गिड़ा रही हैं औरतें


01 December 2014
19:07
-इंदु बाला सिंह

भटक रहीं हैं तेरी संतानें
अनधिकृत बस्तियां टूट रही हैं
आउट हॉउस के एक कमरे के लिये
गिड़गिड़ा रही हैं औरतें ......
माँ !
अच्छा होता
तू निपूती रहती |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें