रविवार, 28 दिसंबर 2014

आज भी लौ जल रही


28 December 2014
22:28
-इंदु बाला सिंह

ओ समय !
शक्ति देना ........
मन मजबूत करना ........
अपने कर्तव्य पथ से न भटकूँ मैं
दिग्भ्रमित न होऊं मैं
लाख अपमानित करें स्वजन
लड़खड़ायें न कदम
कि
अभी सांस है बाकी
और
जाना है दूर बहुत ........
याद रखना है मन में ठगी अपनों की ...............
माना कि सच्चाई का पथ कष्टकर होता है
पर
आत्मतुष्टि तो वह देता ही है .........
जीत का विश्वास ले के
चले थे हम
आज भी
वह लौ माद्धिम सी जल रही है
मन में |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें