आज देखती हूँ
बड़ी बिंदी लगाती हैं महिलाये
यद्यपि उनका साथी गुजर गया है
अच्छा लगता है इस परिवर्तन को देख कर
और
मुझे वह महिला याद आयी
जिसने अकेली औरतों को के मान के लिये कभी बिन्दी ही न लगाई
वह माँ याद आई
जिसने अपने दामाद के गुजरने पर खुद सिंदूर लगाना छोड़ दिया
कुछ लड़ाइयाँ अपने तरीके से लड़ते हैं
और
कुछ बंधन लड़कियां सहर्ष पसंद करती हैं
ब्याह करना लड़की के शान की बात है न कि जरूरत।