रविवार, 1 नवंबर 2026

पिता की उपस्थिति


 

 

अपनी कमाई का खाना है आजीवन

 

सिखाया नहीं पिता ने

 

उसे

 

ब्याह दिया

 

दूसरे की कमाई खाने , पहनने को

 

जरूरत भर खाया , पहना

 

न ही पिता से लेने का मन किया

 

योगी जीवन बन गया

 

ससुराल के खुशी के पल में पिता के दुख याद आये

 

एक एक पैसा जोड़ना याद आया

 

भटक भटक कर मेरे लिए सुपात्र तलाशना याद आया

 

अपने माता पिता के कष्ट आजीवन याद रहे

 

हर मुसीबत में पिता याद आये

 

मेरी बेटी को भी मेरे पिता याद आये

 

उसने अपने सुख दुःख में अपने  पिता की उपस्थिति नहीं महसूस की थी ।

रविवार, 11 अक्टूबर 2026

पिता की बेटी

 


 

 

पिता अस्पताल में गुजरे

 

उस समय मैं भी उसी अस्पताल में भर्ती थी

 

घर लौटी तब पिता का शरीर अस्पताल में  था

 

दो दिन तक अस्पताल में रहा

 

बेटे के आने के बाद अस्पताल का शरीर एम्बुलेंस से उतरा

 

माँ दहाड़ मार कर रोई

 

रिश्तेदार उसे पकड़ कर पिता का मुंह दिखाये और वहां से कमरे में ले गए

 

मैं वीडियो बनाती रही

 

लोग अंतिम दर्शन के लिए आते रहे

 

फूल चढ़ाते रहे

 

पंडित के कर्मकांड के बाद पिता का शरीर स्वर्गवाहन पर चढ़ा

 

लोगों के काफिले संग स्वर्गवाहन चल पड़ा

 

सड़क के अंतिम छोर तक चलती रही मैं कैमरे के साथ

 

मैं अवांछित थी

 

अंत्येष्टि के समय मैं  न थी

 

मैंने कैद किया पिता के शरीर के जाने का

 

मैं  सुख दुख से परे मात्र अपने पिता की बेटी थी ।

 

 

अच्छी लड़की


 

 

वह अच्छी लड़की थी

 

मुझे शादी नहीं करनी

 

तो क्या सारा जीवन यहीं बैठी रहेगी ?

 

बेटी चुप

 

आखिर बेटी की शादी हो गई

 

बेटी अच्छी बहू बनी

 

पति चार बच्चों समेत बीबी को छोड़ कर भाग गया

 

कष्ट से खुद की थोड़ी कमाई में बच्चे बड़ा किया

 

अच्छी औरत ने

 

एक लड़की ने घर से भाग कर ब्याह कर लिया

 

और

 

वह जब तब  सुनाती है

 

मैं तो एक कपड़े में घर से चली गई

 

दूजी संतान बोलती है

 

ब्याह किया है  तो औलाद को तुम नहीं तो कौन पालेगा

 

हमे पाल कर कौन सा बड़ा काम किया

 

अच्छी लड़की का बुरा अंत हुआ।

 

 

 

 

शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026

जीवन का अनुभव


 

 

बुरे , दुखद संबंधों से अलग होना उस पल की मुक्ति है

 

नए सुखद संबंध बना पाना स्वतंत्रता है

 

उलझन मिटना नहीं

 

उसको सुलझाना हमारी मानसिक परिपक्वता है

 

माता पिता के कटु अनुभूतियों को सीखना

 

हमें जिंदगी में तेज चलना सिखाता है

 

बारंबार निकटस्थों की ओर स्मृतियों का लौटना

 

जोड़े रहता है हमें

 

अपनी जड़ों से

 

अतीत का भूलना दिगभ्रमित करता है

 

कमजोर करता है

 

उम्र के साथ मजबूती आना ही जीवन है ।

गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026

भाग्य भरोसे



मन में


मौसम की तरह आते हैं  विचार


वे हमे गढ़ते हैं 


कभी कभी वे वास्पीभूत हो जाते हैं


जीवन की बगिया से खर पतवार चुन फेंकना हमारा कौशल है 


निष्क्रिय इंसान खर पतवार के बिछौने पर भूखे पेट सोता है


भाग्य को कोसता है ।



जीने के लिये


 

 

 

ब्याह

 

सुरक्षा है

 

अपनापन है

 

अकेलापन दूर करने का कानूनी साधन है

 

आपके पास कोई संबंधी न हो

 

तो पति ही सही है

 

पर

 

जीवन में कुछ बन पाने के लिए

 

जरूरी है  अपने चारों ओर खींचना एक सीमारेखा

 

इसके अंदर हर किसी का प्रवेश निषिद्ध है ।

 

 

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026

गुम हो रही तहज़ीब


 

 

तहजीब पलती है

 

रईसों के घर में

 

गरीब के घर में पलती है लडा़इयाँ

 

लड़की लड़ती है घर में

 

लड़का लड़ता है घर और बाहर दोनों जगह

 

वे लड़ते हैं

 

रोटी के लिए

 

खाट के लिये

 

लोग इन लडा़इयों  को समाज का परिवर्तन समझ लेते हैं

 

क्रांति समझने की भूल कर बैठते हैं

 

मिट जाती है

गरीब की भाषाएं और नस्लें

बंगाल के अकाल की तरह

 

कोई रईस कैद कर लेता है यह कहानी साहित्य के पन्ने में ।