मंगलवार, 8 सितंबर 2026

वैराग्य


 

वैराग्य आता है

 

स्वार्थी पिता , पति और पुत्र की तरह

 

तुम्हें किसी भी उम्र में

 

छुड़ा देता है ....


तुम्हारा हर दुनियावी रिश्ता

 

वानप्रस्थ कर देता है वह तुम्हे

 

तुम दे के आदर्श नागरिक नहीं रह पाते

 

 

गुरुवार, 3 सितंबर 2026

रेखाएं देखना चाहूं


खो गई मैं

 

अपने शब्दों मे

 

रचनाओं मे

 

महसूसा है मुझे

 

मेरे बेजुबान  मित्रों न

 

मकान की खिड़कियों दरवाजों और विशालकाय पेड़ों ने

 

मन तैरता है

 

बस यूँ ही

 

खोजता है जन्म का कारण

 

वृहद अभेद्य भुभुलैया सा मन

 

यात्रा करता रहता है अतीत से वर्तमान मे

 

भविष्य कुहासामय है

 

हथेली भीदिखे

 

रेखाएं कैसे पढ़ूं

 

 

शुक्रवार, 28 अगस्त 2026

लड़की और पितृसत्ता


 

 

ब्याह तो करना ही है

 

ससुराल ही तुम्हारा घर है

 

पति बहुत कुछ छोड़ कर गया होगा

 

बेटा है न

 

उसको क्या चीज की कमी है

 

भाई अपना परिवार के उत्थान में लगा है

 

लड़की को मकान की क्या जरूरत

 

बेटी चालीस हजार रुपया महीना कमा रही है

 

भाड़े के घर में माँ के साथ है

 

दूसरी बेटी ने दोस्त का पति चुरा लिया है

 

लड़की  सवर्ण है ।

 

 

गुरुवार, 27 अगस्त 2026

कोई चाह नहीं


 

 

भूल चुकी

 

मैं तो दुःखद अध्याय जीवन के

 

क्या रखा अब बीते पल में

 

पुराने अपनों में

 

साथ न दिये रक्त संबंधी और रिश्ते

 

अहंकार में डूबे वे

 

ईश्वर की लाठी का प्रकोप भी वे भूल चले

 

चाहूँ मैं अब जीना

 

बिना आकांक्षा के ।

घर में लड़कियां


 

 

 

 

लड़की को कॉलेज में एडमिशन में कोटा है

 

सरकारी छात्रवृत्तियां हैं

 

घरों में मुहल्लों में नवरात्रि में पूजी जाती हैं कन्याएँ

 

भाइयों की तरह पिता से पिटाई नहीं खाती लड़कियां 

 

घर की इज्जत होती हैं लड़कियां

 

घर की नींव बनती हैं लड़कियां

 

फिर भी

 

साहित्य महिलाओं पर होनेवाले अत्याचार से भरा पड़ा है

 

आखिर क्यूँ और कैसे ।

 

 

 

 

शनिवार, 22 अगस्त 2026

बिंदी


 

आज देखती हूँ

 

बड़ी बिंदी लगाती हैं महिलाये

 

यद्यपि उनका साथी गुजर गया है

 

अच्छा लगता है इस परिवर्तन को देख कर

 

और

 

मुझे वह महिला याद आयी

 

जिसने अकेली औरतों को के मान के लिये कभी बिन्दी ही न लगाई

 

वह माँ याद आई

 

जिसने अपने दामाद के गुजरने पर खुद सिंदूर लगाना छोड़ दिया

 

कुछ लड़ाइयाँ अपने तरीके से लड़ते है

 

और

 

कुछ बंधन लड़कियां सहर्ष पसंद करती है

 

ब्याह करना लड़की के शान की बात है न कि जरूरत।

गुरुवार, 20 अगस्त 2026

चालीस वर्ष बाद


 

 

गूगल फोटो ने पुरानी याद दिखाई

 

भरे पूरे परिवार की

 

सब खुश थे

 

जमी ़बर्फ़ क्रच आवाज के साथ मन की दीवार छोड़ दी

 

अब श्रम करने की सामर्थ्य रही

 

समय ने सब तहस नहस कर दिया था

 

आज आंखों में सुखद स्वप्न के निशान न  हैं

 

चालीस वर्ष भी कुछ होते है