नसीब की बेटी हैं बच्चियां
जिनकी मां गुलाम है
कितना भी कर ले मां
विभिन्न रूप धर पुरुष शोषण करता है उसका
कभी अपने शारीरिक सुख के लिए खेलता है उससे
तो कभी मां मानमर्दन के लिए धमकाता है उसे
अपनी मित्र मंडली में परोसता है उसे
अच्छा बन छोड़ जाता है एक दिन वह उसे समय से जूझने
ओ बच्चियों
तुझमें मुझे मेरी खुशी कैद है
तू मां है
मैने तुझे मां बनने मौका न दिया
मैं गुनहगार हूं तेरी
मै तुझे दुनिया में लाई
पर जीने का मौका न दे पाई
मुझ पर ईश्वर का वज्र गिरे यही प्रार्थना है मेरी ।