शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026

गुम हो रही तहज़ीब


 

 

तहजीब पलती है

 

रईसों के घर में

 

गरीब के घर में पलती है लडा़इयाँ

 

लड़की लड़ती है घर में

 

लड़का लड़ता है घर और बाहर दोनों जगह

 

वे लड़ते हैं

 

रोटी के लिए

 

खाट के लिये

 

लोग इन लडा़इयों  को समाज का परिवर्तन समझ लेते हैं

 

क्रांति समझने की भूल कर बैठते हैं

 

मिट जाती है

गरीब की भाषाएं और नस्लें

बंगाल के अकाल की तरह

 

कोई रईस कैद कर लेता है यह कहानी साहित्य के पन्ने में ।

 

बुधवार, 30 सितंबर 2026

छोटा बेटा


 

मेरा पिता खो गया बचपन में

सपने देखे मैने

अंग्रेजी पढ़ कर नौकरी तलाशी

डाटा साइंस भी पढ़ लिया

पर नौकरी सोने के हिरण सी छलती गई

हाथ ही न आई

किसी राज्य का बाशिंदा न था

छोटी जात का न था

महज भारतीय पुरुष था

सच्चाई और मेहनत की उंगली पकड़ चलता रहा

जेब फटी थी

जो पैसे आए

विकराल अभाव के कुएं में गिरते रहे

मां बहन अपना मकान के सपने देखते रहे

और

मैं घर का छोटा बेटा अपना परिवार बसाने का

सपने आते रहे

बाल सफेद होते रहे ।

 

सोमवार, 14 सितंबर 2026

मोह

 

 

नदी के इस पार खड़ी  हूं

 

जला दिया है लौटने का पुल खुद मैने

 

निहारूं मैं पुराना भग्नावशेष

 

जितना भी दौड़ूँ

 

आगे न बढ़ पाउं

 

यह कैसा मोह है पुरातन का

 

बढ़ने न दे आगे

 

बदबू भी न महसूस कर पाऊं

 

संबंधों के सड़ेपन की ।

मंगलवार, 8 सितंबर 2026

वैराग्य


 

वैराग्य आता है

 

स्वार्थी पिता , पति और पुत्र की तरह

 

तुम्हें किसी भी उम्र में

 

छुड़ा देता है ....


तुम्हारा हर दुनियावी रिश्ता

 

वानप्रस्थ कर देता है वह तुम्हे

 

तुम देश के आदर्श नागरिक नहीं रह पाते ।

 

 

गुरुवार, 3 सितंबर 2026

रेखाएं देखना चाहूं


खो गई मैं

 

अपने शब्दों में

 

रचनाओं में

 

महसूसा है मुझे

 

मेरे बेजुबान  मित्रों ने

 

मकान की खिड़कियों दरवाजों और विशालकाय पेड़ों ने

 

मन तैरता है

 

बस यूँ ही

 

खोजता है जन्म का कारण

 

वृहद अभेद्य भुभुलैया सा मन

 

यात्रा करता रहता है अतीत से वर्तमान में

 

भविष्य कुहासामय है

 

हथेली भी न दिखे

 

रेखाएं कैसे पढ़ूं

 

 

शुक्रवार, 28 अगस्त 2026

लड़की और पितृसत्ता


 

 

ब्याह तो करना ही है

 

ससुराल ही तुम्हारा घर है

 

पति बहुत कुछ छोड़ कर गया होगा

 

बेटा है न

 

उसको क्या चीज की कमी है

 

भाई अपना परिवार के उत्थान में लगा है

 

लड़की को मकान की क्या जरूरत

 

बेटी चालीस हजार रुपया महीना कमा रही है

 

भाड़े के घर में माँ के साथ है

 

दूसरी बेटी ने दोस्त का पति चुरा लिया है

 

लड़की  सवर्ण है ।

 

 

गुरुवार, 27 अगस्त 2026

कोई चाह नहीं


 

 

भूल चुकी

 

मैं तो दुःखद अध्याय जीवन के

 

क्या रखा अब बीते पल में

 

पुराने अपनों में

 

साथ न दिये रक्त संबंधी और रिश्ते

 

अहंकार में डूबे वे

 

ईश्वर की लाठी का प्रकोप भी वे भूल चले

 

चाहूँ मैं अब जीना

 

बिना आकांक्षा के ।