दुखेगा दिल तो फुंफकार उठेंगे
पिता ...
सोये हैं वे
बेटी के दिल में ।
My 3rd of 7 blogs, i.e. अनुभवों के पंछी, कहानियों का पेड़, ek chouthayee akash, बोलते चित्र, Beyond Clouds, Sansmaran, Indu's World.
एपिस्टिन फाइल खुल रही थी
ईश्वर गायब था
बच्चियां मर रहीं थीं
पका कर खाई जा रहीं थी
अबोध लड़कियां गायब हो रहीं थीं
किसी अखबार ने खबर छापा था
एक बलात्कार की भुक्तभोगी ने लिखी थी आत्मकथा
माहौल में सनसनी थी
सोया मुद्दा गरमाया
बालिका संरक्षण गृह क्यों बनता है
घर में अपनों के पास बालिकाऐं सुरक्षित नहीं हैं क्या ।
संतान का पैर आपके जूते में सामने लायक हो जायेगा एक दिन
याद रखें
अपरिचित हो जाएंगे वे आपके लिये
मोहमुक्त रहना सुख देता
आपकी छाया नहीं धन चाहिए
उन्हें
नया विश्रामागार भाये
इतिहास की राजनीति करते वे ।
बच्चे थे
गणतंत्र दिवस था
वह स्कूल यूनिफार्म पहने बच्चों को सूर्योदय से पहले स्कूल बस में बैठाने निकलती थी
अब बच्चे बड़े हो गए हैं
विदेश में रहते हैं
खूब कमा रहे हैं….....
आज घर चुप हैं
ठंडा है
चाय पीनी पड़ेगी
वह रसोई में चल दी ।
खाना पकाते समय हाथ में आता है
भगोना , थाली , डेगची
और
उनके संग जगता है सोया इतिहास
गैस चूल्हे के संग जगती है
कोयले की अंगीठी
और
कोयला खरीदने के लाइन में लगी एक बालिका
और
हंगामा
कुचली जाती है
कोयला भरे ट्रक से लाइन में लगी पांच वर्षीय लड़की .....
सेल के टाउनशिप की बेटी मैं
याद करती हूं
सेल का अस्पताल
डाक्टर की लाइन में एक पंद्रह वर्षीय लड़की
दर्द देते दांत को निकलवा कर साइकिल से लौटती घर
रात में कम्युनिटी सेंटर में फिल्म देख कर पड़ोसियों के संग लौटती लड़की
बस सांसे लेती रहती है वह अबोध लड़की .....
हम लिख नहीं पाते भविष्य तो
दुलारता है भूतकाल ।
रोज की तरह वह उठी
सब कुछ सामान्य था सड़क पर
बरामदों में बत्तियां जल रहीं थीं
कोहरा के कारण एक मीटर से ज्यादा दूर तक सफेद चादर छाई थी
दूर से कोई चला आ रहा था
छोटी मनुष्य की आकृतियां भी पास आती दिख रहीं थीं
सड़क के कुत्ते कहीं दुबके पड़े थे
गाएं कचरे के ढेर में खाना ढूंढ रही थी
वह बस चलती चली जा रही थी
सुबह की सैर स्फूर्ति पैदा करनेवाली होती है
दूर से एक विशालकाय साया तेजी से दौड़ता आ रहा था
जब तक वह कुछ समझे
उसे कुचल कर चला गया
बच्चे को सरकारी मुआवजा पंद्रह लाख मिला
हाथी शहर की सड़क पर कैसे पहुंचा
सरकारी कर्मचारी परेशान हैं ।