हर घर में कोई न कोई रहता है
मां, बहन , भाभी , मौसी , बुआ , भांजी , भतीजी
हर घर पुकारता है
थके यात्री को
रिश्तों को
पुरुष रिश्तों को .....
मकान में घर है
और घर में मिठास है ।
गरीब वर्ग अपना मकान अपनी पत्नी के नाम कर जाता है
स्त्री है तो घर है ।
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हर घर में कोई न कोई रहता है
मां, बहन , भाभी , मौसी , बुआ , भांजी , भतीजी
हर घर पुकारता है
थके यात्री को
रिश्तों को
पुरुष रिश्तों को .....
मकान में घर है
और घर में मिठास है ।
गरीब वर्ग अपना मकान अपनी पत्नी के नाम कर जाता है
स्त्री है तो घर है ।
असंतोष है
प्रतिक्रिया है
पर घर में ही संगठित नहीं है औरत
परिवर्तन कैसे हो
सत्ता क्या बदलेगी
खाली राजनीतिक मुद्दा हैं औरतें
मीडिल क्लास वर्ग हो या मजदूर वर्ग हो
घर की आर्थिक आय बढ़ाने का श्रोत हैं औरतें ।
चार कदम आगे हैं
पर उसी पल वे तीन कदम पीछे हो जाती हैं औरतें ।
किसी ने न बुलाया उसे
अपने तीज त्यौहार में
घर के शादी , मरण में
मकान के दूसरे हिस्से में रहनेवाले उसके सगे भाई को बुलावा आता रहा
हर घर से
वह रहती रही अपने बच्चों के साथ समाज से कटी ।
शायद भगवान ने भी अपनी निगाहें फेर ली थी ।
ईरान में जंग छिड़ी
मेरे देश में
कुकिंग गैस की किल्लत हो गई ।
मै परेशान हो गई
दो हजार दो एक भरा सिलिंडर ले जाओ
दिव्य ज्ञान मिला मुझे
आंख से खून टपका मेरे
चिंता न करनी चाहिए सिलिंडर की
सरकार समाधान करेगी समस्या का
एक महिला ने मुझे ढाढस दिया
मुझे कोविद काल याद आया
देखते देखते कितने परिचित काल के गाल में समा गये थे
मैने अपने पासबुक को जोर से पकड़ा
इसमें मात्र हजार रुपये थे इस वक्त
कहा से लाऊंगी बाकी के हजार रुपये
सोंच में पड़ गई
होश है
तो
कल्पना ही ।
थका हारा मेरा मन
कभी खुद
तो
किसी के कहने पर मजबूरी में
घर में
देवी देवताओं के पूजन के कर्मकांड लगा रहता है
हर दिन किसी न किसी देवी देवता का है
थक जाती हूँ मैं
रसोई और रिश्तों का सम्हालते
अपने लिए कोई समय नहीं
इतना करने पर भी मुझमे ही कमी है लोगों की निगाह में
आज सोचूँ मैं
क्या हर अपने काम के बाद ईश्वरीय बंदन मौन हो के क्यों नहीं किया
क्यों मैने दूसरों की नकल किया
क्यों अपना समय कर्मकांड में खोया
धनोपार्जन के बारे में न सोंचा
क्यों निर्भर रही आजीवन
किसी के पैसों और मकान के सहारे जीवित रही ।
नसीब की बेटी हैं बच्चियां
जिनकी मां गुलाम है
कितना भी कर ले मां
विभिन्न रूप धर पुरुष शोषण करता है उसका
कभी अपने शारीरिक सुख के लिए खेलता है उससे
तो कभी मां मानमर्दन के लिए धमकाता है उसे
अपनी मित्र मंडली में परोसता है उसे
अच्छा बन छोड़ जाता है एक दिन वह उसे समय से जूझने
ओ बच्चियों
तुझमें मुझे मेरी खुशी कैद है
तू मां है
मैने तुझे मां बनने मौका न दिया
मैं गुनहगार हूं तेरी
मै तुझे दुनिया में लाई
पर जीने का मौका न दे पाई
मुझ पर ईश्वर का वज्र गिरे यही प्रार्थना है मेरी ।