पिता अस्पताल में गुजरे
उस समय मैं भी उसी अस्पताल में भर्ती थी
घर लौटी तब पिता का शरीर अस्पताल में था
दो दिन तक अस्पताल में रहा
बेटे के आने के बाद अस्पताल का शरीर एम्बुलेंस से उतरा
माँ दहाड़ मार कर रोई
रिश्तेदार उसे पकड़ कर पिता का मुंह दिखाये और वहां से कमरे में ले गए
मैं वीडियो बनाती रही
लोग अंतिम दर्शन के लिए आते रहे
फूल चढ़ाते रहे
पंडित के कर्मकांड के बाद पिता का शरीर स्वर्गवाहन पर चढ़ा
लोगों के काफिले संग स्वर्गवाहन चल पड़ा
सड़क के अंतिम छोर तक चलती रही मैं कैमरे के साथ
मैं अवांछित थी
अंत्येष्टि के समय मैं न थी
मैंने कैद किया पिता के शरीर के जाने का
मैं सुख दुख से परे मात्र अपने पिता की बेटी थी ।