बच्चे पैदा करने के एवज में मिले खाना
सबल तलाशे अपना सुख
मातृत्व के नाम पर पूजनीय बनाया उस ने
पैसे कमाना सीख
ओ री लड़की ।
My 3rd of 7 blogs, i.e. अनुभवों के पंछी, कहानियों का पेड़, ek chouthayee akash, बोलते चित्र, Beyond Clouds, Sansmaran, Indu's World.
बच्चे पैदा करने के एवज में मिले खाना
सबल तलाशे अपना सुख
मातृत्व के नाम पर पूजनीय बनाया उस ने
पैसे कमाना सीख
ओ री लड़की ।
बच्चे पैदा करने के एवज में मिले खाना
सबल तलाशे अपना सुख
मातृत्व के नाम पर पूजनीय बनाया उस ने
पैसे कमाना सीख
ओ री लड़की ।
एपिस्टिन फाइल खुल रही थी
ईश्वर गायब था
बच्चियां मर रहीं थीं
पका कर खाई जा रहीं थी
अबोध लड़कियां गायब हो रहीं थीं
किसी अखबार ने खबर छापा था
एक बलात्कार की भुक्तभोगी ने लिखी थी आत्मकथा
माहौल में सनसनी थी
सोया मुद्दा गरमाया
बालिका संरक्षण गृह क्यों बनता है
घर में अपनों के पास बालिकाऐं सुरक्षित नहीं हैं क्या ।
संतान का पैर आपके जूते में सामने लायक हो जायेगा एक दिन
याद रखें
अपरिचित हो जाएंगे वे आपके लिये
मोहमुक्त रहना सुख देता
आपकी छाया नहीं धन चाहिए
उन्हें
नया विश्रामागार भाये
इतिहास की राजनीति करते वे ।
बच्चे थे
गणतंत्र दिवस था
वह स्कूल यूनिफार्म पहने बच्चों को सूर्योदय से पहले स्कूल बस में बैठाने निकलती थी
अब बच्चे बड़े हो गए हैं
विदेश में रहते हैं
खूब कमा रहे हैं….....
आज घर चुप हैं
ठंडा है
चाय पीनी पड़ेगी
वह रसोई में चल दी ।
खाना पकाते समय हाथ में आता है
भगोना , थाली , डेगची
और
उनके संग जगता है सोया इतिहास
गैस चूल्हे के संग जगती है
कोयले की अंगीठी
और
कोयला खरीदने के लाइन में लगी एक बालिका
और
हंगामा
कुचली जाती है
कोयला भरे ट्रक से लाइन में लगी पांच वर्षीय लड़की .....
सेल के टाउनशिप की बेटी मैं
याद करती हूं
सेल का अस्पताल
डाक्टर की लाइन में एक पंद्रह वर्षीय लड़की
दर्द देते दांत को निकलवा कर साइकिल से लौटती घर
रात में कम्युनिटी सेंटर में फिल्म देख कर पड़ोसियों के संग लौटती लड़की
बस सांसे लेती रहती है वह अबोध लड़की .....
हम लिख नहीं पाते भविष्य तो
दुलारता है भूतकाल ।