गुरुवार, 27 अगस्त 2026

कोई चाह नहीं


 

 

भूल चुकी

 

मैं तो दुःखद अध्याय जीवन के

 

क्या रखा अब बीते पल में

 

पुराने अपनों में

 

साथ न दिये रक्त संबंधी और रिश्ते

 

अहंकार में डूबे वे

 

ईश्वर की लाठी का प्रकोप भी वे भूल चले

 

चाहूँ मैं अब जीना

 

बिना आकांक्षा के ।

घर में लड़कियां


 

 

 

 

लड़की को कॉलेज में एडमिशन में कोटा है

 

सरकारी छात्रवृत्तियां हैं

 

घरों में मुहल्लों में नवरात्रि में पूजी जाती हैं कन्याएँ

 

भाइयों की तरह पिता से पिटाई नहीं खाती लड़कियां 

 

घर की इज्जत होती हैं लड़कियां

 

घर की नींव बनती हैं लड़कियां

 

फिर भी

 

साहित्य महिलाओं पर होनेवाले अत्याचार से भरा पड़ा है

 

आखिर क्यूँ और कैसे ।

 

 

 

 

शनिवार, 22 अगस्त 2026

बिंदी


 

आज देखती हूँ

 

बड़ी बिंदी लगाती हैं महिलाये

 

यद्यपि उनका साथी गुजर गया है

 

अच्छा लगता है इस परिवर्तन को देख कर

 

और

 

मुझे वह महिला याद आयी

 

जिसने अकेली औरतों को के मान के लिये कभी बिन्दी ही न लगाई

 

वह माँ याद आई

 

जिसने अपने दामाद के गुजरने पर खुद सिंदूर लगाना छोड़ दिया

 

कुछ लड़ाइयाँ अपने तरीके से लड़ते है

 

और

 

कुछ बंधन लड़कियां सहर्ष पसंद करती है

 

ब्याह करना लड़की के शान की बात है न कि जरूरत।

गुरुवार, 20 अगस्त 2026

चालीस वर्ष बाद


 

 

गूगल फोटो ने पुरानी याद दिखाई

 

भरे पूरे परिवार की

 

सब खुश थे

 

जमी ़बर्फ़ क्रच आवाज के साथ मन की दीवार छोड़ दी

 

अब श्रम करने की सामर्थ्य रही

 

समय ने सब तहस नहस कर दिया था

 

आज आंखों में सुखद स्वप्न के निशान न  हैं

 

चालीस वर्ष भी कुछ होते है

शनिवार, 15 अगस्त 2026

लौट के मत आना



माँ ने कहा 

गाँव में ब्याह देंगे

पिता लड़का ढूंढते रहे 

लड़की को नौकरी में न लगवाया 

ससुराल में जा कर करना 

आखिर लड़का मिला 

शहर में 

लड़के का मकान था 

ब्याह कर रहे हैं 

लौट के मत आना 

माँ ने कहा 

ब्याह हुआ 

चार बच्चे हुए 

लड़के का काम धंधा बंद हो गया

मकान बिक गया

लड़का बीबी और चार बच्चों को किराए के मकान में छोड़ कर भाग गया ।


मंगलवार, 11 अगस्त 2026

चेतो लड़कियो


 

 

ब्याह के लिये

 

कुल गोत्र का ख्याल रखना है

 

लड़के की पक्की नौकरी चाहिये

 

दहेज का इंतजाम पिता करते हैं

 

ब्याह के बाद

 

अपना अपना भाग्य

 

और

 

जिसके पिताहों

 

उसका भी अपना भाग्य

 

कब चेतोगी लड़कियों

शनिवार, 8 अगस्त 2026

काम चाहिये


 

 

किसान ने अपने चारों बच्चों को पढ़ने का मौका दिया

 

नौकरी मिल जाएगी

 

घर सम्हल जाएगा

 

माँ घर संभालती रही

 

अपनी  निकम्मी संतानों का दुख भोगती रही

 

दोनों बेटे और एक बेटी ट्यूशन कर के हाथ खर्च निकलते रहे

 

प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते रहे

 

वैकेंसी चार साल बाद निकली

 

प्रश्नपत्र लीक हुआ

 

रईसों ने प्रश्न पत्र खरीद लिया

 

परीक्षा कैंसल हो गई

 

भाई को काम मिला औरबहन को

 

न उनका ब्याह हु

 

माँ पूरे परिवार का खाना बनाती रही

 

बीमार पड़ती रही

 

इलाज के लिए पैसे चाहिए थे

 

डॉक्टर फ्री में देख लिया था

 

पर दवाओं के लिए पैसे नहीं थे घर में

 

माँे अपने सपनों को गाँव की नदी में बहा दिया

 

अब बच्चे जंतर मंतर की भीड़ में जुड़ गये हैं

 

वे आंदोलनरत हैं ।