बुधवार, 8 जुलाई 2026

अस्पताल की अटेंडेंट



मैं अटेंडेंट हूँ 

आपको मेरी सेवा चाहिए ?

मेरा बारह घंटे  का चार्ज छः सौ रुपये है।

बुखार से बदन तप रहा था मेरा 

मुझे चौबीस घंटे की देखभाल चाहिए थी

दो अटेंडेंट शिफ्ट में रहने लगे मेरे पास

नित्यक्रिया से ले कर कपड़े बदलना 

डाक्टर को बुलाना 

मेरी हर जरूरतों को पूरा किया उन्होंने

वे घर का खाना बना कर अपना खाना साथ लातीं 

दोनों के मर्द घर में रहते 

अपनी पत्नियों से झगड़ते

तीन दिन के बाद मैं डिस्चार्ज हुई

मैं उनके पैसे दे कर निकलने लगी 

उन्होंने मेरे हाथ को चूमा 

उनकी आँखें भर आयीं थी 

मैं एक पल को द्रवित हुई

मैं खुश थी 

मैंने अपने घर लौटने के लिए ओला बुक कर लिया था ।


जुनून



वे दौड़ाए सरदार युवा को 

वह भाग कर घुसा एक गली में 

फिर उसकी कोई खबर न मिली 

दंगे की  याद ने बहन की आँखें भर दी ।

दोस्त किताबें



गरीब गुरबा साहित्य प्रेमी

पढ़ता है किताबें इंटरनेट पर

ये किताबें अपने रहने के लिये जगह नहीं मांगती  कमरे में

उसकी प्यारी दोस्त किताबें उसके के संग संग रहतीं हैं ।


रविवार, 28 जून 2026

लड़कियां और मकान




मध्यवर्ग में 

मकान मिले बेटे को

लड़कियां ब्याही जाती हैं मकान धारी बेटों से

जिनका ब्याह न होय वो भाग जातीं हैं घर छोड़ कर

लड़कियों का मकान नहीं होता 

हर घर में परमानेंट सेविका है

उनकी तनख्वाह उनके निकटस्थ ले जाते हैं 

सेविका बन किसी के घर में जी लेने  की नियति है उनकी ।

सोमवार, 22 जून 2026

पीले टोपी सफेद टोपी



सफेद टोपी आदेश दे रही है सड़क से 

पीली टोपी खम्बे पर काम कर रही है

बिजली गुल है 

मैं परेशान हूँ

जनरेटर  नहीं है घर में

मुझे पीली टोपी से कोई मतलब नहीं ।


शनिवार, 6 जून 2026

पुश्तैनी मकान



उसने अपने पुश्तैनी मकान को गिरा दिया 

उस स्थान पर नया मकान खड़ा किया 

उसे पुश्तैनी मकान पसंद था 

पर हर थोड़ी देर में उस मकान के खिड़की  दरवाजे  , दीवारें  बोलने लगतीं थीं

उसे आवाजों से सख्त नफरत थी 

उसने पूरे घर को एयर कंडीशंड कर लिया ।


रविवार, 24 मई 2026

मैने उसे सदा अकेली पाया



वह बरामदे की सीढ़ी पर  बैठी है 

उसके संग उस के रिश्ते हैं 

गांव के परिचित हैं 

पोखरी का पानी है 

अमराई है 

छांव तले खेलते लड़के हैं

स्कूल कॉलेज के मित्र है 

खट्टे मीठे अनुभव हैं 

पेड़ पौधे हैं 

बरसते बादल हैं 

सामने चिलचिलाती धूप भी बैठी है

सभी बतियाते हैं उससे

वे सदा उसके साथ रहते हैं 

सबको जीना है

चरित्र बनना है

सबको शब्द चाहिए

कोलाहल सा रहता है उसके मन में 

सभी पात्रों को 

जीना है पुस्तकों में 

वह  सो जाती है 

तो कभी-कभी वे उसके सपने में आते हैं 

वह अकेली नहीं है 

रास्ते में चलते समय भी वे उसके साथ-साथ चलते रहते हैं 

वह लेखक है ।