मन के अंधियारे में लगा
एक सुख का पौधा
सूखे ना
सदा रहे हरियाया
दुख के बादल में
ग़म के कुहासे में
न फले और न ही फूले
प्राणवायु बने
नैनों में चमके ।
My 3rd of 7 blogs, i.e. अनुभवों के पंछी, कहानियों का पेड़, ek chouthayee akash, बोलते चित्र, Beyond Clouds, Sansmaran, Indu's World.
मन के अंधियारे में लगा
एक सुख का पौधा
सूखे ना
सदा रहे हरियाया
दुख के बादल में
ग़म के कुहासे में
न फले और न ही फूले
प्राणवायु बने
नैनों में चमके ।
परिस्थितियों की आंधी में
मैं फौलाद बनना चाही
पिता जैसा मजबूत बनना चाही
दयालु और दृढ़ निश्चयी बनना चाही
मेहनतकश बनना चाही
दिन बीतते गये
मैने माँ की तरह बच्चे पैदा किये
बच्चे बड़े हुए
और
औरत ही बनी रही
न तो माँ बन सकी और न ही पिता
बस
बेहया का पौधा बन गई ।
गरीब गुरबा साहित्य प्रेमी
पढ़ता है किताबें इंटरनेट पर
ये किताबें अपने रहने के लिये जगह नहीं मांगती कमरे में
उसकी प्यारी दोस्त किताबें उसके के संग संग रहतीं हैं ।