मध्यवर्ग में
मकान मिले बेटे को
लड़कियां ब्याही जाती हैं मकान धारी बेटों से
जिनका ब्याह न होय वो भाग जातीं हैं घर छोड़ कर
लड़कियों का मकान नहीं होता
हर घर में परमानेंट सेविका है
उनकी तनख्वाह उनके निकटस्थ ले जाते हैं
सेविका बन किसी के घर में जी लेने की नियति है उनकी ।