ek chouthayee akash
My 3rd of 7 blogs, i.e. अनुभवों के पंछी, कहानियों का पेड़, ek chouthayee akash, बोलते चित्र, Beyond Clouds, Sansmaran, Indu's World.
शनिवार, 15 अगस्त 2026
लौट के मत आना
मंगलवार, 11 अगस्त 2026
चेतो लड़कियो
ब्याह के लिये
कुल गोत्र का ख्याल रखना है
लड़के की पक्की नौकरी चाहिये
दहेज का इंतजाम पिता करते हैं
ब्याह के बाद
अपना अपना भाग्य
और
जिसके पिता न हों
उसका भी अपना भाग्य
कब चेतोगी लड़कियों ।
शनिवार, 8 अगस्त 2026
काम चाहिये
किसान ने अपने चारों बच्चों को पढ़ने का मौका दिया
नौकरी मिल जाएगी
घर सम्हल जाएगा
माँ घर संभालती रही
अपनी निकम्मी संतानों का दुख भोगती रही
दोनों बेटे और एक बेटी ट्यूशन कर के हाथ खर्च निकलते रहे
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते रहे
वैकेंसी चार साल बाद निकली
प्रश्नपत्र लीक हुआ
रईसों ने प्रश्न पत्र खरीद लिया
परीक्षा कैंसल हो गई
न भाई को काम मिला और न बहन को
न उनका ब्याह हुआ
माँ पूरे परिवार का खाना बनाती रही
बीमार पड़ती रही
इलाज के लिए पैसे चाहिए थे
डॉक्टर फ्री में देख लिया था
पर दवाओं के लिए पैसे नहीं थे घर में
माँ ने अपने सपनों को गाँव की नदी में बहा दिया
अब बच्चे जंतर मंतर की भीड़ में जुड़ गये हैं
वे आंदोलनरत हैं ।
गुरुवार, 6 अगस्त 2026
जिम्मेवार औरत
आदमी छोड़ के भाग गया औरत और एक बेटा बेटी को
औरत हाड़ तोड़ काम करती रही
बर्तन मांजती रही
पोचा लगती रही बड़े घरों में
बेटा बड़ा हो के भाग गया किसी लड़की से ब्याह कर के
घर जमाई बन गया
और लौटा
दो बच्चों का बाप बन के
बेटा महीने में दस दिन काम करता है
बाकी समय
अपनी औरत से लड़ता है
बिनब्याही बेटी दूसरे शहर कमाने चली गई
और
आज अपना और अपने बेटे के परिवार पाल रही है ।
निर्दोष कैदी
बाइस साल जेल में बिताने के बाद
जेल ने कैदी को निर्दोष साबित किया
क्या भाग्य को दोष दूं
या
ईश्वर को
घर लौटा तो निकटस्थ मर गये थे गरीबी की मार में
छोटा सा मकान मिट्टी में मिल गया था
अब कैदी परिस्थितियों का कैदी था
भीख पर गुजारा कर रहा था ।
बुधवार, 5 अगस्त 2026
आदिवासी समाज में प्रेम विवाह
मंगलवार, 4 अगस्त 2026
भगवान के पैसे
कम आमदनी थी
ऑफिस जाने का भाड़ा के लिए
वह अपनी माँ के भगवान के सामने रखे सिक्के चुरा लेती थी
भगवान जी !
मैं अगले महीने तनख्वाह मिलने पर लौटा दूंगी
और
वह हर महीने भगवान की मूर्ति के सामने वापस रख भी देती थी
हर महीने कोई नई जरूरतें पैदा हो जातीं थीं
और
उसे भगवान के सामने रखे पैसे उठाना पड़ता था ।