किसान ने अपने चारों बच्चों को पढ़ने का मौका दिया
नौकरी मिल जाएगी
घर सम्हल जाएगा
माँ घर संभालती रही
अपनी निकम्मी संतानों का दुख भोगती रही
दोनों बेटे और एक बेटी ट्यूशन कर के हाथ खर्च निकलते रहे
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते रहे
वैकेंसी चार साल बाद निकली
प्रश्नपत्र लीक हुआ
रईसों ने प्रश्न पत्र खरीद लिया
परीक्षा कैंसल हो गई
न भाई को काम मिला और न बहन को
न उनका ब्याह हुआ
माँ पूरे परिवार का खाना बनाती रही
बीमार पड़ती रही
इलाज के लिए पैसे चाहिए थे
डॉक्टर फ्री में देख लिया था
पर दवाओं के लिए पैसे नहीं थे घर में
माँ ने अपने सपनों को गाँव की नदी में बहा दिया
अब बच्चे जंतर मंतर की भीड़ में जुड़ गये हैं
वे आंदोलनरत हैं ।