वह प्राइवेट सि्कयुरिटी गार्ड था
उसने शान से कहा था
हम ऊंची जाति के हैं
ये लोग अंबेडकर वाले हैं
आखिर कैसे यह विचार पनपा उस शहरी गार्ड के मन में
सोचनीय मुद्दा है ।
My 3rd of 7 blogs, i.e. अनुभवों के पंछी, कहानियों का पेड़, ek chouthayee akash, बोलते चित्र, Beyond Clouds, Sansmaran, Indu's World.
वह प्राइवेट सि्कयुरिटी गार्ड था
उसने शान से कहा था
हम ऊंची जाति के हैं
ये लोग अंबेडकर वाले हैं
आखिर कैसे यह विचार पनपा उस शहरी गार्ड के मन में
सोचनीय मुद्दा है ।
मन के अंधियारे में लगा
एक सुख का पौधा
सूखे ना
सदा रहे हरियाया
दुख के बादल में
ग़म के कुहासे में
न फले और न ही फूले
प्राणवायु बने
नैनों में चमके ।
परिस्थितियों की आंधी में
मैं फौलाद बनना चाही
पिता जैसा मजबूत बनना चाही
दयालु और दृढ़ निश्चयी बनना चाही
मेहनतकश बनना चाही
दिन बीतते गये
मैने माँ की तरह बच्चे पैदा किये
बच्चे बड़े हुए
और
औरत ही बनी रही
न तो माँ बन सकी और न ही पिता
बस
बेहया का पौधा बन गई ।