गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026

पिता

 

 

दुखेगा दिल तो फुंफकार उठेंगे

 

पिता  ...

 

सोये हैं वे

 

बेटी के दिल मे

बुधवार, 4 फ़रवरी 2026

ईश्वर को ढूंढूं मैं


 

 

एपिस्टिन फाइल खुल रही थी

 

ईश्वर गायब था

 

बच्चियां मर रहीं थीं

 

पका कर खाई जा रहीं थी

 

अबोध लड़कियां गायब हो रहीं थीं

 

किसी अखबार ने खबर छापा था

 

एक बलात्कार की भुक्तभोगी ने लिखी थी आत्मकथा

 

माहौल में सनसनी थी

 

सोया मुद्दा गरमाया

 

बालिका संरक्षण गृह क्योंनता है

 

घर  में अपनों के पास बालिकाऐं सुरक्षित नहीं हैं क्या

इतिहास की राजनीति


 

 

संतान का पैर आपके जूते में सामने लायक हो  जायेगा एक दिन

 

याद रखें

 

अपरिचित हो जाएंगे वे आपके लिये

 

मोहमुक्त रहना सुख देता

 

आपकी छाया नहीं धन चाहिए

 

उन्हे

 

नया विश्रामागार भाये

 

इतिहास की राजनीति करते वे ।

 

रविवार, 25 जनवरी 2026

मां का गणतंत्र दिवस

 

 

 

बच्चे थे

 

गणतंत्र दिवस था

 

वह स्कूल यूनिफार्म पहने बच्चों को सूर्योदय से पहले स्कूल बस में बैठाने निकलती थी

 

अब बच्चे बड़े हो गए हैं

 

विदेश में रहते हैं

 

खूब कमा रहे हैं….....

 

आज घर चुप हैं

 

ठंडा है

 

चाय पीनी पड़ेगी

 

वह रसोई में चल दी ।

 

 

मंगलवार, 6 जनवरी 2026

कुलबुलाता भूतकाल


 

 

खाना पकाते समय हाथ में आता है

 

 भगोना , थाली , डेगची

 

और

 

उनके संग जगता है सोया इतिहास

 

गैस चूल्हे के संग जगती है

 

कोयले की अंगीठी

 

और

 

कोयला खरीदने के लाइन मे लगी एक बालिका

 

और

 

हंगामा

 

कुचली जाती है

 

कोयला भरे  ट्रक से लाइन में लगी पांच वर्षीय लड़की .....

 

 

से के टाउनशिप की बेटी मैं

 

याद करती हू

 

सेल का अस्पताल

 

डाक्टर की लाइन में एक पंद्रह वर्षीय लड़की

 

दर्द देते दांत को निकलवा कर साइकिल से लौटती घर

 

रात में कम्युनिटी सेंटर में फिल्म देख कर पड़ोसियों के संग लौटती लड़की

 

बस सांसे लेती रहती है वह अबोध लड़की .....

 

हम लिख नहीं पाते भविष्य तो

 

दुलारता है भूतकाल

 

 

सोमवार, 29 दिसंबर 2025

हाथी शहर में


 

 

 

रोज की तरह वह उठी

 

सब कुछ सामान्य था सड़क पर

 

बरामदों में बत्तियां जल रहीं थीं

 

कोहरा के कारण एक मीटर से ज्यादा दूर तक सफेद चादर छाई थी

 

दूर से कोई चला आ रहा था

 

छोटी मनुष्य की आकृतियां भी पास आती दिख रहीं थीं

 

सड़क के कुत्ते कहीं दुबके पड़े थे

 

गाएं कचरे के ढेर में खाना ढूंढ रही थी

 

वह बस चलती चली जा रही थी

 

सुबह की सैर स्फूर्ति पैदा करनेवाली होती है

 

दूर से एक विशालकाय  साया तेजी से दौड़ता आ रहा था

 

जब तक वह कुछ समझे

 

उसे कुचल कर चला गया

 

बच्चे को सरकारी मुआवजा पंद्रह लाख मिला

 

हाथी शहर की सड़क पर कैसे पहुंचा

 

सरकारी कर्मचारी परेशान हैं ।

 

मंगलवार, 23 दिसंबर 2025

रेल का यात्री



मीडिया ने परिचय कराया तुमसे

जब तक तुम्हें पहचानूं

समझूं

तुम उतर गए स्टेशन पर

निशानियां छोड़ गए 

बातें कर पाने के सुख से वंचित कर गए 

अभी कितना कुछ सीखना था मुझे तुमसे

तुम मील का पत्थर बन कर रह गए 

लोग कहते हैं 

तुम जिंदा हो अपनी रचनाओं में 

न तो भाया मुझे इतिहास 

और 

न ही इतिहास पुरुष 

भूल जाऊंगी तुम्हें एकदिन 

तुम बिंदु बन चिपक जाओगे काल के कपाल पर ।

एक #चिट्ठी जो लिख कर रख दी गई ।