शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

ऊंची जाति की शान


 

 

वह प्राइवेट सि्कयुरिटी गार्ड था

 

उसने शान से कहा था

 

हम ऊंची जाति के है

 

ये लोग अंबेडकर वाले है

 

आखिर कैसे यह विचार पनपा उस शहरी गार्ड के मन मे

 

सोचनीय मुद्दा है ।

मंगलवार, 28 जुलाई 2026

सुख का पौधा


 

 

 

मन के अंधियारे में लगा

 

एक सुख का पौधा

 

सूखे ना

 

सदा रहे हरियाया

 

दुख के बादल में

 

ग़म के कुहासे में

 

न फले और न ही फूले

 

प्राणवायु बने

 

नैनों में चमके ।

सोमवार, 27 जुलाई 2026

पिता और बेटी





बेटी का मन ठहरा रहता है आजीवन पिता के पास


पिता गुजर भी जायें 

तो

हर सुख दुख के पल में वे याद आते हैं बेटी को


पर पैतृक मकान मिलता है बेटे को


और बेटी के पैतृक मकान की रूपरेखा बदल जाती है 



शुक्रवार, 24 जुलाई 2026

कर्मगति



सोच कर बोलना 

दिल न दुखाना जन्मदाता का 

कर्मगति टारै नहीं टरेगी 

जन्मदाता न रहेंगे 

उनकी यादें 

उन संग बीता बचपन रह जाएगा ।

बेहया


परिस्थितियों की आंधी में

मैं फौलाद बनना चाही

पिता जैसा मजबूत बनना चाही

दयालु और दृढ़ निश्चयी बनना चाही

मेहनतकश बनना चाही

दिन बीतते गये

मैने माँ की तरह बच्चे पैदा किये

बच्चे बड़े हुए

और

औरत ही बनी रही

न तो माँ बन सकी और न ही पिता

बस

बेहया का पौधा बन गई ।

बुधवार, 8 जुलाई 2026

अस्पताल की अटेंडेंट



मैं अटेंडेंट हूँ 

आपको मेरी सेवा चाहिए ?

मेरा बारह घंटे  का चार्ज छः सौ रुपये है।

बुखार से बदन तप रहा था मेरा 

मुझे चौबीस घंटे की देखभाल चाहिए थी

दो अटेंडेंट शिफ्ट में रहने लगे मेरे पास

नित्यक्रिया से ले कर कपड़े बदलना 

डाक्टर को बुलाना 

मेरी हर जरूरतों को पूरा किया उन्होंने

वे घर का खाना बना कर अपना खाना साथ लातीं 

दोनों के मर्द घर में रहते 

अपनी पत्नियों से झगड़ते

तीन दिन के बाद मैं डिस्चार्ज हुई

मैं उनके पैसे दे कर निकलने लगी 

उन्होंने मेरे हाथ को चूमा 

उनकी आँखें भर आयीं थी 

मैं एक पल को द्रवित हुई

मैं खुश थी 

मैंने अपने घर लौटने के लिए ओला बुक कर लिया था ।


जुनून



वे दौड़ाए सरदार युवा को 

वह भाग कर घुसा एक गली में 

फिर उसकी कोई खबर न मिली 

दंगे की  याद ने बहन की आँखें भर दी ।