मेरा पिता खो गया बचपन में
सपने देखे मैने
अंग्रेजी पढ़ कर नौकरी तलाशी
डाटा साइंस भी पढ़ लिया
पर नौकरी सोने के हिरण सी छलती गई
हाथ ही न आई
किसी राज्य का बाशिंदा न था
छोटी जात का न था
महज भारतीय पुरुष था
सच्चाई और मेहनत की उंगली पकड़ चलता रहा
जेब फटी थी
जो पैसे आए
विकराल अभाव के कुएं में गिरते रहे
मां बहन अपना मकान के सपने देखते रहे
और
मैं घर का छोटा बेटा अपना परिवार बसाने का
सपने आते रहे
बाल सफेद होते रहे ।