रविवार, 25 जनवरी 2026

मां का गणतंत्र दिवस

 

 

 

बच्चे थे

 

गणतंत्र दिवस था

 

वह स्कूल यूनिफार्म पहने बच्चों को सूर्योदय से पहले स्कूल बस में बैठाने निकलती थी

 

अब बच्चे बड़े हो गए हैं

 

विदेश में रहते हैं

 

खूब कमा रहे हैं….....

 

आज घर चुप हैं

 

ठंडा है

 

चाय पीनी पड़ेगी

 

वह रसोई में चल दी ।

 

 

मंगलवार, 6 जनवरी 2026

कुलबुलाता भूतकाल


 

 

खाना पकाते समय हाथ में आता है

 

 भगोना , थाली , डेगची

 

और

 

उनके संग जगता है सोया इतिहास

 

गैस चूल्हे के संग जगती है

 

कोयले की अंगीठी

 

और

 

कोयला खरीदने के लाइन मे लगी एक बालिका

 

और

 

हंगामा

 

कुचली जाती है

 

कोयला भरे  ट्रक से लाइन में लगी पांच वर्षीय लड़की .....

 

 

से के टाउनशिप की बेटी मैं

 

याद करती हू

 

सेल का अस्पताल

 

डाक्टर की लाइन में एक पंद्रह वर्षीय लड़की

 

दर्द देते दांत को निकलवा कर साइकिल से लौटती घर

 

रात में कम्युनिटी सेंटर में फिल्म देख कर पड़ोसियों के संग लौटती लड़की

 

बस सांसे लेती रहती है वह अबोध लड़की .....

 

हम लिख नहीं पाते भविष्य तो

 

दुलारता है भूतकाल

 

 

सोमवार, 29 दिसंबर 2025

हाथी शहर में


 

 

 

रोज की तरह वह उठी

 

सब कुछ सामान्य था सड़क पर

 

बरामदों में बत्तियां जल रहीं थीं

 

कोहरा के कारण एक मीटर से ज्यादा दूर तक सफेद चादर छाई थी

 

दूर से कोई चला आ रहा था

 

छोटी मनुष्य की आकृतियां भी पास आती दिख रहीं थीं

 

सड़क के कुत्ते कहीं दुबके पड़े थे

 

गाएं कचरे के ढेर में खाना ढूंढ रही थी

 

वह बस चलती चली जा रही थी

 

सुबह की सैर स्फूर्ति पैदा करनेवाली होती है

 

दूर से एक विशालकाय  साया तेजी से दौड़ता आ रहा था

 

जब तक वह कुछ समझे

 

उसे कुचल कर चला गया

 

बच्चे को सरकारी मुआवजा पंद्रह लाख मिला

 

हाथी शहर की सड़क पर कैसे पहुंचा

 

सरकारी कर्मचारी परेशान हैं ।

 

मंगलवार, 23 दिसंबर 2025

रेल का यात्री



मीडिया ने परिचय कराया तुमसे

जब तक तुम्हें पहचानूं

समझूं

तुम उतर गए स्टेशन पर

निशानियां छोड़ गए 

बातें कर पाने के सुख से वंचित कर गए 

अभी कितना कुछ सीखना था मुझे तुमसे

तुम मील का पत्थर बन कर रह गए 

लोग कहते हैं 

तुम जिंदा हो अपनी रचनाओं में 

न तो भाया मुझे इतिहास 

और 

न ही इतिहास पुरुष 

भूल जाऊंगी तुम्हें एकदिन 

तुम बिंदु बन चिपक जाओगे काल के कपाल पर ।

एक #चिट्ठी जो लिख कर रख दी गई ।


शनिवार, 13 दिसंबर 2025

देवी के देश में


 

 

कचड़े में खाना ढूंढती गाय

 

बेटे के घर के पिछले कमरे में गठरी बनी मां

 

गांव में छूटी पत्नी

 

इलेक्शन के समय याद आतीं है

 

वैसे हम रोज देवी के सामने धूप जलाते है

 

घंटी भी बजाते है

 

एन जी ओ भी सम्हालते है

मंगलवार, 9 दिसंबर 2025

लड़कियां


 

 

एक पुश्त को आजादी न मिली

 

दूसरी को अभाव मिला

 

तीसरी को मात्र कमाना खाना मिला

 

तीनों पुश्त ने श्रम किया मजदूर की तरह

 

किसी पुश्त को वसीयत में मकानमिला

 

लड़कियां थीं न ।

औरत और बकरा


 

 

औरत बचा लेती है समय अपने लिये

 

रात उसकी अपनी होती है

 

कोई कोना तलाशती है वह

 

और

 

अकेली बैठती है

 

यह उसका अपना साम्राज्य है

 

जिसकी वह मालकिन है

 

यादें उतरतीं हैं उसके सामने

 

कभी वह उन्हें चित्रबद्ध करती है

 

तो कभी लेखनबद्ध

 

दिमाग खाली हो।जाता है

 

फिर बीज पड़ते है

 

निकली कोंपल को

 

करे के डर से

 

पिंजड़े में रख सो जाती है ।