03
December 2014
08:10
-इंदु बाला
सिंह
लाख बंद करो
दरवाजे
ऐन वक्त पे
सो ही जाते
हैं द्वारपाल
और
द्वार स्वयं
खुल जाते हैं
पीड़ा से
तड़प तड़प छटपटा के
ले ही लेती
है
जन्म
रचना .......
विचार
लांघ जाते हैं
हर
सूरज |
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