गुरुवार, 4 दिसंबर 2014

व्यूह


05 December 2014
11:39
-इंदु बाला सिंह

हैरतंगेज है यह व्यूह
जितना तोड़ते हैं
उतना बनता जाता है
और
मन ज्योत जगाये रहते हैं हम
कभी तो टूटेगा यह व्यूह
यह आस लिये मन में
बस
चलते ही जाते हैं हम |

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