शनिवार, 1 नवंबर 2014

आखिर कब तक


28 October 2014
07:06
-इंदु बाला सिंह

सभ्य हुआ इंसान
और
उसने स्वछन्द अस्तित्व वाली स्त्री जाति को
अपनी सम्पत्ति मान
प्यार से
सुख सुविधा सुरक्षा के नाम पर
अपने बाड़े में रख
दे दिया
रिश्तों का नाम
अब
सुधार रहा है
वह
स्त्री जाति को
आरक्षण का नाम दे के
आखिर  कितने आरक्षण देंगे हम
कालेजों , आफिसों में
कितना अद्भुत है
फीस माफ़ करते हैं हम
कालेजों में
लडकियों की
पर
प्रोमोशन के नाम पे
ग्लास सीलिंग लगाते हैं हम
महिला आकाश में
और
अपना दिन भर का आक्रोश
निकालते हैं 
हम
घर में टंगी बालू की बोरी पर
आखिर कब तक |

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