सोमवार, 24 नवंबर 2014

जगना है कल फिर


24 November 2014
18:59
-इंदु बाला सिंह

रात भई
सब सोये
तू भी सो जा मन
कि
अभी
नहीं उतरा है
तेरे कांधे का बोझ
और
जगना है तुझे
कल फिर भोर भोर |

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