शनिवार, 1 नवंबर 2014

श्रमिक की आशा


29 October 2014
07:24
-इंदु बाला सिंह

श्रमिक की
रोटी और बेटी
बड़ी कीमती होती
तभी तो
वह खबर बनती
उछाल मारता अख़बार
छाप के उन्हें
कमाते हम उन खबरों से
पर
श्रमिक भर आशा आँखों में
सोते और जागते |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें