सोमवार, 24 नवंबर 2014

दिन की दास्तान


24 November 2014
18:33
-इंदु बाला सिंह

उड़ चिरैय्या !
उड़ !
कि
जब तक है
मन में
आंगन का मोह
कैसे मिलेगा तुझे तेरा आकाश
पंख पसार
उड़ जा री दुलारी
सांझ ढले घर आना
और
सुनाना
दिन की दास्तान |

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