19
November 2014
19:38
-इंदु बाला
सिंह
कैसी खोज है
ये
किसी अनागत
सपने की
जिसकी खोज
में
चलते रहे हम
और एक
तन्द्रा में डूबे रहे सदा
वर्ष
दर वर्ष
पर
अबकी नींद
टूटेगी
तो
बहेंगे
हम हवाओं में
नित
सुबहोशाम
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