27
October 2014
06:21
-इंदु बाला
सिंह
तीसरा दर्जा
नहीं है
ट्रेन में
अब
कौन बोलता है
यह
है न ट्रेन
की जनरल बोगी
एक तीसरा
दर्जा
जिसमें
हम चलते हैं
तीसरे दर्जे
के इन्सान
माल सरीखे
ठुंसे हुये
घर में भी है
तीसरा दर्जा
परित्यक्त अपनों का
आफिस में है
तीसरे दर्जे
के कर्मचारियों का
कक्षा में है
थर्ड स्थान
पाने वाले छात्र का
जो पाता है
पारितोषिक
विद्यालय के
वार्षिकोत्सव में
मैट्रिक
परीक्षा में
थर्ड डिवीजन
पास करनेवाले
शान से
कहते हैं
हम मैट्रिक
पास हैं भाई
तुम्हारी तरह
अनपढ़ नहीं
हर स्थान में
है
तीसरा दर्जा
तीसरे दर्जे
का भी ताव है
क्योकि
हर विद्रोह की
नींव पड़ती है
तीसरे दर्जे
में ही
और
तख्ता पलटता
है
यह
तीसरा दर्जा ही |
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें