शनिवार, 15 नवंबर 2014

आत्मबोध


16 November 2014
10:34
-इंदु बाला सिंह

निष्क्रियता के पलों में भी
जग जाता है
कभी कभी
आत्मबोध
और
वह
रेंगता है .....
फुंफकारता है .....
दौड़ाता है .....
डंक मार बेसुध कर देता है
नियति को |

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