शनिवार, 15 नवंबर 2014

अज्ञानता में मस्ती


14 November 2014
22:41
-इंदु बाला सिंह

कहाँ से शरू हुयी थी
याद कर के होगा 
कहाँ होगी खतम
जानने की चाह नहीं
बस इसी उधेड़बुन में
चलते रहे
वे
कोसते रहे
अपने नसीब को ........
अज्ञानता में जीना भी
बड़ा
मस्त होता है
क्यों कि
रात में भूल जाता है
आदमी
कि
कल क्या पकेगा घर में |

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