31
October 2014
00:59
इंदु बाला
सिंह
हर शाम तुम
सब
एक दुसरे से
झगड़ते हुये
जब चढ़ जाते हो
गोद में मेरी
तब सफल हो जाता है मातृत्व मेरा
जिस पल से थी
छोडी
थी छोडी अपनी
आकांक्षा मैंने
उस पल से
तुम्हारी
तोतली बातों में
मेरा मन बहलता
है
मेरा इन्तजार
करती तुम्हारी उत्सुक आँखे
गौरान्वित
कर जाती हैं मुझे
मेरे जन्म की
सफलता का अहसास दिला
महका देतीं
हैं
वे मेरा धूप
से झुलसा आकाश |
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