मंगलवार, 4 नवंबर 2014

घूमता हूं परखता हूं मैं


06 August 2014
09:31
-इंदु बाला सिंह
क्यूँ घूमता है आईना.
तू
मेरे साथ साथ
ओ आईने !
गर प्रतिविम्ब ही रखना है मेरा
तो
रह तू मेरे घर में ...
क्यूंकि
जीवन इमानदारी से जीने के लिये
रंग बदल कर घूमता हूं मैं
अपने राज्य में
और
परखता हूं
अपनों को |

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