शनिवार, 1 नवंबर 2014

अपनों का उपहार


30 October 2014
17:33
-इंदु बाला सिंह

कभी कभी यूं लगता है
जैसे
किसी दुसरे ग्रह की जीव हूं मैं
और 
सदा रहती हूं
अपनी दुनियां में
अनूठी सी
सदा हर बाधाएं फलांगती हुयी
मौन चलती हुयी
सड़क पर
न जाने यह कैसा अकेलापन है
जो
अपनों ने उपहार में दिया है |

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