31
October 2014
22:53
-इंदु बाला
सिंह
बूढ़ा
मुस्कुरा रहा
था
उल्लसित
वातावरण में
मन्त्र मुग्ध
भीड़ के जयघोष से
आज
वह पुलकित था
पर
कब उसकी आंख
लग गयी
उसे
पता ही न चला
सुबह हुई
तो
उसने सब कुछ
हर रोज की
तरह पाया
सब
अपने काम पर जा रहे थे |
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