शनिवार, 1 नवंबर 2014

सम्मान की तलाश


31 October 2014
22:53
-इंदु बाला सिंह

बूढ़ा
मुस्कुरा रहा था
उल्लसित वातावरण में
मन्त्र मुग्ध भीड़ के जयघोष से
आज
वह पुलकित था
पर
कब उसकी आंख लग गयी
उसे
पता ही न चला
सुबह हुई
तो
उसने सब कुछ
हर रोज की तरह पाया

सब अपने काम पर जा रहे थे |

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