29
October 2014
08:14
-इंदु बाला सिंह
कुछ पत्थर सड़क पे हैं
कुछ जंगलों में
कुछ हवेलियों में
कुछ हैं मन्दिरों में
जुबान देते हैं हम उन्हें
बातें करते हैं
हम भटकते हैं
राम नहीं हैं
हम
यायावर सरीखे
आज यहां हैं
कल
न जाने कहाँ
पर दे जाते
हैं हम
कुछ
पत्थरों को जुबाँ |
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