सोमवार, 3 नवंबर 2014

बिन सास का घर


02 November 2014
22:46
इंदु बाला सिंह

बरामदे में बैठी औरतें
अपने अपने
सेवा का अनुभव सुना रही थीं ......
सबने सेवा की थी
अपने महीनों बिस्तर पर पड़े ससुर के
अंतिम दिनों में
और
और घर के अंदर बैठी
मैं
सोंच रही थी
कि
शायद सबकी सास गुजर चुकी है
काश
मुझे भी ऐसा ही घर मिले
जहां सास ही न हो |

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