बुधवार, 15 अक्टूबर 2014

औरत कितनी नासमझ तू


30 September 2014
16:49
-इंदु बाला सिंह

मर्द को
एक हीरा समझ
औरतें छीनतीं
उसे
एक दुसरे के हाथों से
वह औरत
माँ , बहन ,पत्नी , भाभी ......कोई भी रिश्ताधारी हो
और
मुंह के बल गिर जातीं
पर
फिर भी न समझ पातीं वे
कि
मर्द वस्तु नहीं
एक इंसान है
एक संयुक्त परिवार का कर्ता धर्ता है
और
उनकी नासमझी का फायदा उठा
वह
डट कर रिश्तों की राजनीति करता है |

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