27
September 2014
08:51
-इंदु बाला
सिंह
बचपन
खिलखिलाता है
कामवाली
बेटियों की बाहों में
और
सजता है
सजता है
खूबसूरत
खुशबूदार कांजीवरम साड़ियों की गोद में |
कामवाली
बेटियां
पढ़ न पायें
तो क्या हुआ
जी लेती हैं
सुरक्षित
बड़े
घर के बचपन के संग |
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