21
October 2014
08:48
-इंदु बाला
सिंह
भौंचक हो
देखा मैंने
उस
टी० शर्ट पर
सूती शर्ट पहनी
बेलचा
चलाती लड़की को
जिसके
शर्ट के बटन
खुले थे
और
कमर में बाँधा
था उसने
एक गमछा
मिटा दिया था
उसने
कर्म क्षेत्र
में
लिंग भेद
पेट की भूख
तो
बस भूख ही
रहती है
न होती उसकी
कोई जाति
समझा गयी वह
शारीरिक श्रम
की कमाई खानेवाली |
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