24
September 2014
21:56
-इंदु बाला
सिंह
रात में
कल के आक्रमण
की योजना बना
निश्चिन्त
होती है बुद्धि
और
हर
भोर भिड़ जाती है नसीब से
पर
अजेय पहाड़ सा
नसीब
टूटे न टूटता
है
आशा है
कभी तो सफल
होगी बुद्धि
नसीब का टुकड़ा
अपने घर लाने में |
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें