बुधवार, 29 अक्टूबर 2014

खुशबूदार बिटिया


27 October 2014
05:54
-इंदु बाला सिंह

प्रेम के सागर में
डुबकी लगती खुशहाल खुशबूदार बिटिया
कब
कामवाली बन जाती
हर रिश्ते की
वह समझ ही न पाती
और
जब तक
वह समझ पाती ,
उस पर मोहर लग चूका होता
कामवाली का
उसे किसी आफिस में भी
गर नौकरी मिलती
तो
बस तृतीय श्रेणी दर्जे की ही मिलती |

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