27
October 2014
05:54
-इंदु बाला
सिंह
प्रेम के
सागर में
डुबकी लगती खुशहाल खुशबूदार बिटिया
कब
कामवाली बन
जाती
हर रिश्ते की
वह समझ ही न
पाती
और
जब तक
वह समझ पाती ,
उस पर मोहर लग
चूका होता
कामवाली का
उसे किसी आफिस
में भी
गर नौकरी
मिलती
तो
बस तृतीय
श्रेणी दर्जे की ही मिलती |
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