बुधवार, 29 अक्टूबर 2014

गुलाबी गर्माहट जोड़े हमें


25 October 2014
10:15
-इंदु बाला सिंह

साहित्य जोड़े
दिलों को
रहो तुम सागर पार
या
स्थल बार्डर पार
आओ पढ़ें
हम उन दिलों को
जो
मिल न सके कभी
और
थे वे
एक ही सागर की सन्तान
चलो
इस धरा की
गुलाबी गर्माहट में
आज
मनायें हम
मानवता का त्यौहार |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें