25
October 2014
10:15
-इंदु बाला
सिंह
साहित्य जोड़े
दिलों को
रहो तुम सागर
पार
या
स्थल बार्डर
पार
आओ पढ़ें
हम उन दिलों
को
जो
मिल न सके कभी
और
थे वे
एक ही सागर की
सन्तान
चलो
इस धरा की
गुलाबी
गर्माहट में
आज
मनायें हम
मानवता का
त्यौहार |
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