बुधवार, 15 अक्टूबर 2014

स्त्री के आंसू


03 October 2014
22:48
-इंदु बाला सिंह

वर्ष पर वर्ष बीतते रहे
और
स्त्री के आंसू
समाज में
सहानुभूति बटोरते रहे
इतिहास हमें बताता
वह स्त्री
जो रोयी नहीं
कभी भी हमारी प्रिय बनी नहीं
स्त्री का अपमान कर पाने की क्षमता
हमारे पौरुष की पहचान है
सशक्त महिला रिश्ते की पहचान है
सदाबहार मुद्दा था और है
स्त्री के आंसू , दुःख और अपमान |

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