24
October 2014
07:51
-इंदु बाला
सिंह
मन के हारे
हार है
मन के जीते
जीत
सुन
ले प्यारे !
मेरे दुलारे !
हारने न देना
कभी अपना मन
भूलना न कभी
सुनामी
महसूसा हाथी
ने ........
मतवाला हो भाग
चढ़ा था
उंची पहाड़ी पर
महावत की
अनसुनी कर
महसूसा था
मछलियों ने भी
छुप गयी थीं
वें
समुद्र की
गहरायी में
हर सुनामी
क्षणिक होती
है
जिसके बाद
हर सचेत सजीव
की जीत है |
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