13
October 2014
08:48
-इंदु बाला
सिंह
आठ आदमी आये
हैं
दो किलो चावल
बैठाना पड़ेगा
सब्जी काटते काटते जान चली जायेगी .....
कामवाली
पोछा लगाते
लगाते
बकबकाती जा
रही थी
और
उसके पीछे
पीछे थी मालकिन
क्या पता कब
कुछ उठा ले
किसी कमरे से
अरे !
मैं भी बनाती थी कभी ऐसे ही
और
तुम्हारे जैसे
ही
पिछवाड़े में
आउट हॉउस में रहती थी
शहद भरा था
मालकिन के
मुंह में
और
कामवाली मुग्ध
थी
' माँ जी ' की
मित्रता पे |
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें