मंगलवार, 14 अक्टूबर 2014

हम पत्थर से खड़े रहे


24 September 2014
21:55
-इंदु बाला सिंह

विह्वल हो उठता है मन
और
हतप्रभ हो जाती है बुद्धि
जब
कभी कभी
मुड़ के खुद को देखने से
यूं लगता है
मानो हम चले ही नहीं
बस हमारा समय बह गया
हम पत्थर से
अपने स्थान पे खड़े रहे |

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