बुधवार, 15 अक्टूबर 2014

बेटी एक इन्सान है


15 October 2014
10:53
-इंदु बाला सिंह

सबल माँ के
उद्गार और आशीस दिशानिर्देशक यंत्र होते हैं
सन्तान के लिये
और
वह प्रसन्नचित्त रह
पार लगा लेती  है
अपना जहाज
पर
दुर्बल माँ की सन्तान
बस
जाल डालती रहती है समुद्र में
मछली पकड़ती है
जीने के लिये
क्यों न हम
बेटी को
दो परिवार जोड़ने का माध्यम न बना
एक
सबल इंसान बनायें
उसे
सबल माँ बनायें |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें