गुरुवार, 23 अक्टूबर 2014

कामवाली


23 October 2014
11:20

-इंदु बाला सिंह

कामवाली
कभी बहू है  
तो
कभी बेटी
पर
बेटी
तो मेहमान है
घर की
और
आजकल मेहमान को
लोग एक दिन ही रखते हैं
घर में
रात तो मेहमानों की
उस टू स्टार होटल में गुजरती है 
जिसका
किराया बेटी खुद देती है
लेकिन
बहू ही बेटी है
क्योंकि
वह
आती है
अपने ससुर की तेरही में
आखिर
लोकलाज भी कोई चीज होती है
कामवाली
कितना पूण्य बटोरती है
सेवा करके
मुहल्ले के बुजुर्गों की
यह
दिखता है
हमें
कामवाली के
चमकते चेहरे पे
उसके भरे पूरे

खुश स्वस्थ खिलखिलाते परिवार में |

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