मंगलवार, 12 अगस्त 2014

मुट्ठी में है आज समय


13 August 2014
07:04
-इंदु बाला सिंह

पाया तुम्हें महलों में
क्या तुम भी गरीब हो हमारी  तरह
या
कोई दुखियारी रोती है मौन
पता नहीं
पर
हमने ले ली है लाठी
और
अब हम चले तोड़ने
झूठ की टांग
आज मन करे तो लग जाना
हमारे पीछे
क्योंकि
इस समय बंधा है समय हमारी  मुट्ठी में |
हम हैं 
समुद्री चक्रवात
बचना जरा
मौसम की न सुनी
चेतावनी
जिसने
वह डूबा जल  में
ये लो
हम आये
हर हर हर हर ........
अब 
जितना भागना है
भाग ले आगे
अपने थैले में
ले के
अपना सुख
कि
हम निकल चुके अब
तुम्हारे नाम के मन में लिखित  आदेश के साथ |
कहते हैं
कि
सत्य की जननी क्रांति है
पर
हम संतानें हैं शांति की
और
हमारी शीतलता ठंडी कर देगी
हर अहंकारी , धोखेबाज की गर्मी को
अरे !
तुम क्या पहचानोगे हमें
क्योंकि
अंधे हो गये हो तुम
धन मद में ..........
लो आ पहुंचे
हम तुम्हारे घर में
हम हैं
सरकारी इन्कम टैक्स कर्मचारी |

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें